गरीब को पक्का मकान देने में छ्त्तीसगढ़ फिसड्डी, 2020-21 में एक भी मकान नहीं हुए स्वीकृत

Badal Singh/Raipur | इसे कोरोनाकाल का असर कहें या प्रधानमंत्री आवास के मामले में प्रदेश का गिरता ग्राफ, यदि सत्र 2020-21 के आंकड़ो पर गौर करें तो मामला ‘शून्य’ की गरिमा बनाए हुए है। चलो, इसे क्वाटर्ली मार्कशीट कहकर काम चलाया जा सकता है क्योंकि अभी सत्र पूरा होने में सात महीने बचे हैं, लेकिन पिछले सत्र याने 2019-20 के आंकड़ो को भी अगर देखें तो पीएम आवास के मामले में पप्पू पास नहीं हो रहा , कहने का मतलब पिछले दो सालों में लोगों को पक्का मकान देने के मामले में प्रदेश जर्बदस्त पिछड़ा है।

पूर्व सीएम रमन सिंह के सवालों का पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने दिया जवाब

दरअसल, विधानसभा मानसून सत्र के दौरान पूर्व सीएम डॉक्टर रमन सिंह ने प्रधानमंत्री आवास से जुड़े कुछ सवाल किए जिसके जवाब में पंचायत मंत्री टी एस सिंहदेव ने प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) के सत्र 2018-19, 2019-20, 2020-21 का पूर्ण ब्यौरा दिया।

छ्त्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) के कुल प्रकरण स्वीकृत

पीएम आवास (ग्रामीण) अंतर्गत सत्र 2018-19 में छ्त्तीसगढ़ में 3 लाख 48 हजार 960 आवेदन स्वीकृत हुए थे, वहीं 2019-20 में 1 लाख 51 हजार 095 आवेदन ही स्वीकृत हुए याने पिछले सत्र के मुकाबले आधे से भी कम, वहीं अगर इस सत्र 2020-21 की बात करें तो आंकड़ा ‘शून्य’ पर बना हुआ है।

छत्तीसगढ़ में पीएम आवास ‘ग्रामीण’ के कुल पूर्ण आवास

पूर्ण आवास याने वो घर जो बनकर पूरे हो गए हों, ऐसे मकानों के आंकड़े को अगर देखें तो सत्र 2018-19 में 3 लाख 15 हजार 980 मकानों का काम पूरा हो गया था और 2019-20 में यह आंकड़ा गिरते हुए 967 में लटक गया। वहीं अगर 2020-21 को देखें तो यहां भी मामला ‘शून्य’ है।

प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास ‘ग्रामीण’ के कितने मकानों के काम बाकी

पीएम आवास काम बाकी का मतलब अलग अलग स्तर से होता है, जैसे – प्रकरण स्वीकृति के बाद काम शुरू न हुआ हो या केवल नींव लेवल या प्लीन्द लेवल में काम आकर अटका हो यह सभी अपूर्ण की श्रेणी में आते हैं। छत की ढलाई और दीवारों पर प्लास्टर के काम के बाद इसे पूर्ण माना जाता है। तो प्रदेश ऐसे अटके मामले रहे 2018-19 में 32 हजार 980 और 2019-20 में यह आंकड़ा पहुंचा 1 लाख 50 हजार 128 याने 2018 के मुकाबले 4 गुना से ज्यादा का काम पेंडिंग हो गए।

पीएम आवास में क्या होता है केंद्र और राज्य का योगदान

पीएम आवास बनाने के लिए जो धनराशि स्वीकृत होती है उसमें केंद्र और राज्य दोनों सरकार का अंश याने हिस्सा शामिल होता है जिसे 60:40 के अनुपात में बांटा जाता है। स्वीकृत आवेदकों को सरकार किश्त में धनराशि उनके खाते में डालती है। 2018-19 में केंद्र सरकार ने 2636 करोड़ 96 रुपये केन्द्रांश के रूप में दिए वहीं 2019-20 में 562 करोड़ 54 लाख रुपये केन्द्रांश मिला। राज्य सरकार के अंश से 2018-19 में 1650 करोड़ का राज्यांश दिया गया था, जिसके बाद दो सत्र 2019-20 | 2020-21 में कोई धनराशि राज्यांश के रूप में नहीं दी गयी है।
फिलहाल आवेदकों को जारी किए किश्त मो देखें तो अब तक 5874 करोड़ 11 लाख रुपये आवेदकों को भुगतान किए गए हैं, वहीं 1016 करोड़ 67 लाख की धनराशि बकाया है।

देशभर में कहाँ अटक रही है छ्त्तीसगढ़ की कृपा

जैसे पंचायत मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास ‘ग्रामीण’ छत्तीसगढ़ का रिकॉर्ड ब्यौरा दिया उसी प्रकार केंद्र सरकार भी सत्रवार रिपोर्ट जारी करती है। जिसमें छ्त्तीसगढ़ को अगर देखें तो साल 2018-19 में हमारी स्थिति बेहतर थी, इस सत्र में प्रदेश में 3 लाख 16 हजार 188 घरों का काम पूरा हुआ, वहीं 2019-20 में आंकड़ा गिरकर 1159 में आ गया।

देशभर में प्रधानमंत्री आवास के काम पूरा करने के मामले में 2018-19 में छ्त्तीसगढ़ तीसरे नम्बर पर था वहीं 2019-20 में खिसककर 14वें नम्बर आ गया

ओवर आल अगर देखें तो साल 2015 के जून में मोदी सरकार द्वारा लायी गयी इस योजना में छ्त्तीसगढ़ में अब तक 7 लाख 43 हजार 701 मकान बनाए जा चुके हैं।

(Data Resources : ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार)
(छ्त्तीसगढ़ विधानसभा सत्र 2020, प्रश्नकाल)
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