बस्तर में फिर नक्सली मचाने लगे है लाल आतंक, पिछले एक महीने में कर चुके हैं 40 से भी ज्यादा हत्याएं

तोपचंद, बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक बार फिर नक्सली खूनी खेल खेलने में उतारू हो गए हैं, पिछले एक महीने में 40 से भी ज्यादा हत्याओं को नक्सलियों ने अंजाम दिया है। बीजापुर में मंगलवार को गंगालूर थाना क्षेत्र के डोडी तुमनार और पीलिया गांव से तीन दिन पहले अगवा किए गए चार ग्रामीणों की नक्सलियों ने हत्या कर दी है। अगवा एक अन्य ग्रामीण के बारे में कोई सूचना नहीं है। दहशतजदा ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दिए बिना शवों को दफना दिया है। हालत यह है कि वे गांव से बाहर ही नहीं निकल रहे हैं। हालांकि पुलिस इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है। बताया जाता है कि एक सप्ताह पहले भी डोडी तुमनार में नक्सलियों ने तीन ग्रामीणों की हत्या की है।

जानकारी के अनुसार शनिवार को 20-25 की संख्या में हथियारबंद नक्सल ग्राम सावनार, पीड़िया और डोडी तुमनार में आ धमके थे। इस दौरान उन्होंने पांच ग्रामीणों को अगवा कर लिया था। इनमें से सावनार के कुरसमपारा निवासी संदीप कुरसम (25), हेमलापारा निवासी रामा हेमला (35) समेत डोडी तुमनार व पीड़िता के एक-एक ग्रामीण की हत्या कर दी है। सूत्रों के अनुसार एक सप्ताह पहले भी नक्सलियों ने पुलिस के लिए मुखबिरी करने के शक में डोडी तुमनार के तीन ग्रामीणों की हत्या की है।

बीजापुर में पिछले एक महीने में नक्सलियों ने दहशत बनाने के लिए 30 से भी ज्यादा हत्याएं की है, लेकिन इसकी अधिकारिक पुष्टि बस्तर पुलिस नहीं करता है, लेकिन 15 मौतों की पुष्टि करता है। नक्सली जवानों के अलावा ग्रामीणों को अपना निशाना बना रहे हैं। पिछले एक माह में वे 15 लोगों की हत्या कर चुके हैं। ग्रामीणों पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने का आरोप लगाकर उनकी हत्या कर रहे हैं। इसके पहले गंगापुर थाना क्षेत्र के ही पुसनार और मेटापाल के चार ग्रामीणों की नक्सलियों ने हत्या की थी। एक दिन पहले ही बासागुड़ा थाना क्षेत्र के फुटबॉल गांव में ग्रामीण दासर रमन्ना की हत्या की है। इसके पहले कुटरू इलाके में एएसआइ और सहायक आरक्षक की हत्या की थी। एक दिन पहले ही भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के चिहका में नक्सलियों ने बर्खास्त सहायक आरक्षक की हत्या की थी।

कब किसे कहाँ मारा

  • 23 अगस्त- कुटरू- माओवादियों के स्माल एक्शन टीम द्वारा कुटरू के सरे बाज़ार सहायक आरक्षक की धारधार हथियार से हमला कर की गई हत्या।
  • 31 अगस्त- कुटरू थाने में पदस्थ ASI कुटरू से बीजापुर के लिए बाइक से रवाना हुए थे। बीच रास्ते से अपहरण कर माओवादी अपने साथ ले गए और हत्या कर शव को सड़क पर फेंक दिया।
  • 5 सितंबर- गंगालूर थानाक्षेत्र के हिरोली गांव में जनअदालत लगाकर पुसनार और मेटापाल के 4 ग्रामीणों की निर्मम हत्या माओवादियों द्वारा की गई।
  • 11 सितंबर- जांगला थानाक्षेत्र के कॉन्ड्रोजि गांव में मजदूरी भुगतान के लिए गए हुए वन परिक्षेत्राधिकारी की गांव के अंदर ही निर्मम हत्या माओवादियों द्वारा की गई।
  • 14 सितंबर- तोयनार थानाक्षेत्र के मिडते गांव में सहायक आरक्षक पर माओवादियों द्वारा प्राणघातक हमला। हमले में जवान बुरी तरह से हुआ ज़ख्मी। रायपुर में चल रहा घायल जवान का इलाज।
  • 18 सितम्बर- नये पुलिस लाइन में पदस्थ CAF के जवान मल्लूराम सूर्यवंशी की निर्मम हत्या कर शव को गंगालूर-बीजापुर मार्ग पर पदेडा गांव के नज़दीक फेंक दिया। पुलिस के मुताबिक जवान 13 सितंबर से लापता था।

माओवादियों द्वारा 1 माह के अंदर ज़िले में 6 हमले को अंजाम दिया गया। जिसमें 1 ASI, 2 सहायक आरक्षक की हत्या की गई। वहीं 1 सहायक आरक्षक माओवादी हमले में बुरी तरह जख्मी हुआ। 1 रेंजर की हत्या की गई तो वहीं 4 निर्दोष आदिवासियों पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर जनअदालत में हत्या की गई। इसके अलावा बस्तर के दंतेवाड़ा, सुकमा जिलों में भी नक्सलियों ने हत्याओं को अंजाम दिया है।

बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने कहा है कि बस्तर में पुलिस के ऑपरेशन से नक्सलियों में खलबली मची हुई है, यह उनके आतंक की समाप्ति है और खुद बस्तर में स्थापित रखने के लिए अंतिम लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसमें उनकी हार होना तय है, वे अपना आतंक बनाए रखने के लिए निर्दोष ग्रामीणों की हत्या कर रहे हैं। सुंदरराज ने कहा नक्सल ऑपरेशन में और तेजी लाएंगे

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