फ़िल्म वालों की हकीकत: क्या कर रहा छालीवुड, लॉकडाउन में

प्रियांशा लाज़रस: कोरोना संक्रमण और लॉक डाउन की मार झेल रहा है, भारत के कई हिस्सों में अनलॉक 1.0 के तहत बाजार खुलने लगे हैं, इस राज्यों की लिस्ट में छ्त्तीसगढ़ सबसे आगे है, जहां धीरे-धीरे ज्यादातर चीजें वापस पटरी पर आ गई लेकिन छत्तीसगढ़ी सिनेमाजगत आज भी कोरोना महामारी की मार झेल रहा है। इन दिनों छालीवुड के कलाकरों से लेकर हमारे मंचीय कार्यक्रम करने वाले कलाकरों तक को रोजमर्रा के समान जुटाने भी संघर्ष करना पड़ रहा है। संकट के इस दौर में अपने लोगों के लिये छालीवुड ने खुद का एक कोष बनाकर अब तक 300 से ज्यादा कलाकारों को आर्थिक मदद पहुंचाई है। तोपचंद ने इस मुद्दे पर छालीवुड में लंबे समय से सक्रिय अभिनेता, डायरेक्टर, स्पॉट बॉय से बात की।

 

छत्तीसगढ़ के सुपर स्टार पद्मश्री अनुज शर्मा बताते हैं कि इन दिनों उनकी भी दो फिल्में ‘मोर यार सुपर स्टार’ और ‘मार डारय मया म’ रुकी हुई हैं।

अनुज शर्मा की दो फ़िल्में ‘मोर यार सुपर स्टार’ और ‘मार डारय मया म’ रुकी हुई हैं

 

सवाल : छालीवुड का सबसे ज्यादा प्रभावित वर्ग कौन सा है।

अनुज शर्मा : सभी वर्ग, हम सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, मेरा मेकअप आर्टिस्ट अगर मेरा मेकअप न करे, या लाइट मैन अगर लाइट ही न लगाए, डायरेक्टर फिल्म डायरेक्शन न करे तो अनुज शर्मा अकेले का क्या कर लेगा। इस कोरोना संक्रमण और लॉक डाउन से सभी वर्गों का काम प्रभावित हुआ है। डेली वेजेज वाले वर्कर्स को ज्यादा तकलीफें हुई, ऐसे भी लोग हैं जिनके यहाँ खाने के भी पैसे नहीं होंगे।

 

सवाल : सरकार की ओर से कोई मदद ??

अनुज शर्मा : नहीं ऐसी कोई मदद तो अब तक नहीं मिली है, लेकिन छालीवुड से जुड़े हम सभी कलाकरों ने मिलकर जरूर एक फंड बनाया है जिनसे हमारे कलाकार आर्टिस्ट और क्रू को आर्थिक रूप से कुछ सहायता दी जा सके। यह फंड उनके लिए है जो लंबे समय से इस फील्ड से जुड़े हुए हैं और इन दिनों जिनकी माली हालात ठीक नहीं। हमनें इस सहायता कोष से अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मदद की है। यह छ्त्तीसगढ़ के कलाकरों द्वारा तैयार किया गया फण्ड है।

 

छालीवुड के सबसे पहले सफल डायरेक्टर सतीश जैन का कहना है कि घाटे का सही आंकलन करने के लिये थिएटर खुलने का इंतज़ार करना होगा।

 

सवाल : लॉक डाउन के चलते छालीवुड की आने वाली कितने फिल्मों पर काम रुक गया?

सतीश जैन : लगभग 20 से 25 फ़िल्म और कुछ बड़ी फिल्में भी शामिल हैं, जिनमें अनुज शर्मा की दो फिल्में है, मन कुरैशी की चार फिल्में, दिलेश साहू की फ़िल्म शामिल हैं। जिनमें लगभग 10 से 11 फिल्में ऐसी है जोकि थिएटर में रिलीज होने की बारी आ चुकी थी लेकिन फ़िल्म पूरी होने के बावजूद रिलीज नहीं हो सकी। बाकियों का काम तो अधर में अटक गया.

सवाल : इससे छालीवुड को आर्थिक नुकसान कितना हुआ

सतीश जैन : इसका आज आंकलन करना कठिन हैं क्योंकि यह तब पता चलेगा जब फिल्में थिएटर में रिलीज होंगी और तब पब्लिक फ़िल्म देखने थिएटर में जाते हैं या नहीं, क्योंकि लोगों के मन में एक तरह से कोरोना का डर बैठ चुका है, आने वाले दिनों में पब्लिक प्लेस या पब्लिक गेदरिंग में भी असर देखने को मिलेगा।

 

उपासना वैष्णव जिन्होंने लगभग 150 छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अब तक काम किया है। वो इन दिनों टिक-टॉक वीडियो बना रही हैं। उपासना ने हाल ही में नेटफ्लिक्स पर आई फ़िल्म चमनबाहर में भी एक महत्वपूर्ण किरदार निभाया है।

 

सवाल : इन दिनों आप क्या कर रही हैं, वक्त कैसा बीत रहा है?

 

उपासना वैष्णव : अभी तो टिक-टॉक में ही वीडियो बना रहे हैं, शुरुआती लॉक डाउन तो खूब इंजॉय किया परिवार से साथ अच्छा वक्त बिताया लेकिन एक कलाकार के लिए उसका काम भी जरूरी है।

 

सवाल : आपकी कितनी फिल्मों का काम रुक गया?

उपासना वैष्णव : इस 2019-20 सेशन में छोटी-बड़ी मिलाकर मैनें कुल 17 फिल्में की हैं जिनमें से लगभग सभी का काम होली के पहले हो चुका था। मार्च में तीन फिल्में साइन करने वाली थीं जो रुक गई है।

सवाल : लॉक डाउन का छालीवुड में क्या असर देखने को मिला?

उपासना वैष्णव : हमारे छ्त्तीसगढ़ का फ़िल्म जगत छोटे-छोटे कलाकारों से मिलकर बना है, जिनकी आर्थिक स्थिति उतनी बेहतर नहीं होती। हम काम पूरी मेहनत से करते हैं लेकिन अर्थिक रूप से इंडस्ट्री छोटी है इसलिए पर्दे के पीछे रहने वाले कैमरा क्रू, मेकअप आर्टिस्ट, लाइट मैन से लेकर डेली वेज के वर्कर्स के जीवन में लॉक डाउन का खासा असर पड़ा है, सरकार से मदद की अपील की है लेकिन अब तक कोई मदद तो नहीं मिल सकी। छालीवुड का एक बड़ा वर्ग इन दिनों रोजमर्रा के सामान जुटाने भी अक्षम है।

 

 

फिल्मों में लाइट और स्पॉट बॉय सप्लाई करने वाले शैलेन्द्र वर्मा बताते हैं की PDS का चावल और खेती अभी सहारा है

 

सवाल : स्पॉट ब्वॉय क्रू कितना प्रभावित हुआ?

 

शैलेन्द्र वर्मा : मेरे अंडर में 40 से 50 टेक्नीशियन की टीम हैं, जो छालीवुड में अपनी सेवा देते आए हैं, अभी सभी की हालत नाजुक है, हर व्यक्ति के अंदर एक खासियत होती है उस हिसाब से वह काम करता है, किसी और काम को करके आदमी पेट भर लेगा लेकिन हमारे टीम का लगन सिर्फ परदे के पीछे काम करने में लगता है।

सवाल : किस तरह की परेशनियों का सामना करना पड़ रहा है?

शैलेन्द्र वर्मा : सबसे बड़ी परेशानी आर्थिक है, क्योंकि जब हाथ में जिस दिन काम होता है केवल उस दिन के ही पैसे मिलते हैं। हमारे लोग डेली वेजेज में काम करते हैं लेकिन उसका आधार वर्किंग डे से होता है और लॉक डाउन के कारण न हाथ में काम है और न ही पैसे। हमारे सीनियरों ने मदद की है, संस्कृति विभाग ने सीधे मदद के लिए आस्वस्त किया है, अब देखते हैं क्या होता है।

 

 

सवाल : अभी खर्च कैसे चल रहा है?

शैलेन्द्र वर्मा : हमारे क्रू के बहुत से साथी बीपीएल श्रेणी से आते हैं और सभी राशनकार्ड से चावल उठाकर जैसे तैसे जीवन कट रहा है, थोड़ी-मोड़ी खेती किसानी से गुजरा हो जा रहा है ।

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