बांस का बास्ता, बस्तर में बन रहा अच्छी सेहत का रास्ता

खई खजाना डेस्क। बस्तर अपनी अनूठी परंपरा के साथ साथ खान-पान के लिए भी जाना जाता है। आदिवासी पहले खान-पान के लिए जंगलों पर निर्भर हुआ करते थे, जंगलों से खाने की जरूरत को पूरा करते थे। जिसमें से कुछ व्यंजन आज भी चले आ रहे हैं।

एक ऐसा ही व्यंजन है “बास्ता”.. जिसे आदिवासी बड़े चाव से खाते है। “बास्ता” बांस के पौधे से बनाया जाता है, इसे कई इलाकों में करील भी कहा जाता है।

बस्तर में बांस बहुत पाए जाते है, बारिश के मौसम में बांस बड़े पैमाने पर होता है। बास्ता नए अंकुरित होते बांस के डंठल(कोंपल) को पतले -पतले चिप्स जैसा काट कर उससे बनाई जाने वाली सब्जी है। इसे रसेदार और सूखी सब्जी जैसा पकाया जाता है, इसे दाल या अन्य सब्जियों में मिलकर भी पकाते हैं। और यह आदिवासियों का प्रिय भोजन है।

बांस का कोंपल हल्का पीले रंग का होता है और इसकी महक बेहद तेज होती है। दुनिया भर में पाई जाने वाली बांस की सभी प्रजातियों में से केवल 110 प्रजातियों के बांस के कोंपल ही खाने योग्य होते हैं। इनमें औषधीय गुण भी पाए जाते है, जो बहुत से बिमारियों से बचाते है।

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