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निमंत्रण को लेकर बोले RSS के डॉ. वैद्य- निमंत्रण कैसे दिया जाता है? मुझे तो नहीं मिला…

तोपचंद, रायपुर। RSS के सह सर कार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य (Dr. Manmohan Vaidya) ने आज रायपुर में प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने मीडिया से कई विषयों पर बात की। कांग्रेस के भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) को लेकर उन्होंने कहा कि, भारत जोड़ने का काम कोई भी करेगा, अच्छी बात है, लेकिन प्रेम से जोड़ेंगे या नफरत से? उनके बाप-दादा ने संघ का बहुत तिरस्कार किया। इसके बाद भी संघ रुका नहीं। लगातार बढ़ता रहा है।

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जनसंख्या कानून को लेकर कही ये बात

जनसंख्या कानून के संबंध में डॉ. वैद्य ने कहा कि, इस संबंध में संघ ने पहले ही नीति तय कर ली है। आने वाले 50 वर्ष की जरूरतों को ध्यान में रखकर कानून लागू करना चाहिए। यह सभी पर एक समान लागू होना चाहिए।

निमंत्रण पर बोले- हमें कोई निमंत्रण नहीं आया

पत्रकार वार्ता में जब उनसे पूछा गया कि, सीएम भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) द्वारा आत्मानंद स्कूलों और गोठानों को देखने के लिए संघ को निमंत्रण दिया गया है। इस पर डॉ. वैद्य ने कहा कि, हमें कोई निमंत्रण नहीं दिया गया है। निमंत्रण कैसे दिया जाता है? मुझे तो नहीं मिला।

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समंवय बैठक की दी जानकारी

रायपुर में हुए तीन दिवसीय समन्वय बैठक के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. वैद्य ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में सभी जाति-वर्ग की सहभागिता रही है। केवल कुछ के ही नाम की चर्चा होती है। भारत की अनेक भाषा, अनेक जाति, अनेक उपासना का लोग पालन करते हैं, इन सभी को जोड़ने वाला भारत का स्व है। यह स्व कैसे प्रकट होगा, इसकी भी चर्चा हुई। भारत का स्व यहां की आध्यात्मिकता है। ईश्वर एक है, उसे बुलाने के नाम अनेक हो सकते हैं। 11 सितंबर 1893 शिकागो स्पीच में इसी बात का उल्लेख किया था।

भारत का राष्ट्र पश्चिम के नेशन से अलग है। भगवान राम ने उत्तर से दक्षिण को बांधकर रखा है। कृष्ण ने पूर्व पश्चिम भारत को बांधकर रखा। शिव सर्वत्र हैं। भारत के जोड़ने वाले तत्व को जोड़ना मुख्य है। भारत में स्व को नकारा गया। अनदेखी की गई। भारत का स्व जितनी मात्रा में प्रकट होना था, नहीं हुआ। उस पर कैसे बढ़ सकते हैं, उस पर भी चर्चा हुई।

ब्रांडेड चीजें अच्छी हैं, यह चलन बढ़ा है। स्थानीय को बढ़ावा देने पर जोर देंगे। जीडीपी के आधार पर आर्थिक आधार मापने के बदले नए भारतीय मानक इंडेक्स की बात उठी। कृषि शिक्षा में परिवर्तन आवश्यक है। एग्रीकल्चर ग्रेजुएट खेती नहीं करते, नौकरी करते हैं। जो खेती करते हैं, उन्हें शिक्षा देने पर बात की गई। हिंदुत्व की पढ़ाई पर बात हुई है। न्यायालयों में भारतीय भाषाओं पर बात हो, जिससे लोगों को समझ में आए, यह भी चर्चा की गई है। जनजातीय का माइग्रेशन रोकने के विषय पर चर्चा की गई।

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