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दंगे के बाद करावल नगर आकर कैसा लगा ?

दिल्ली पुलिस को ट्रैफिक कंट्रोल करने में दिक्कत आ रही थी इसलिए पूर्वी दिल्ली में गाड़ियां जलाने की इजाज़त दे दी गई। कितना शांत और खुली खुली और चौड़ी सड़कें हैं दिल्ली की। इन पर चलिए स्वास्थ्य की समस्या नहीं रहेगी। अभी कुछ देर पहले ही चल कर आया हूं।

सड़क पर लोग खासकर युवा लाठी, डंडे, रॉड, तलवार आदि से लैस थे। कहीं कहीं गाड़ी भी जल रही थी। सुरक्षित रूम में पहुंचने के लिए श्री राम कहना आवश्यक था नहीं तो वानार सेना ने सीधे परलोक पंहुचा ने की व्यवस्था भी कर रखी थी। शुक्र है परलोक जाना नहीं हुआ।

खजूरी खास पुलिस स्टेशन के पास और सीआरपीएफ कैंप के पास। वानर सेना की मुस्लिम या फिर कहे असुर सेना से भी भिड़ंत के संभावनाएं बनती जा रही थी। चूंकि आम इंसान हूं इस लिए ये लड़ाई देखने के लिए रुका नहीं। किसी तरह से सुरक्षित रूम पर पहुंचा।

चूंकि राम और मुस्लिम आक्रांताओं का राज्य मैंने देखा नहीं है इसलिए नहीं बता सकता माननीय मोदी जी और केजरीवाल जी ने इनमें से कौन सा राज्य बनाया है??

वैसे ताज्जुब की बात है कि दिल्ली पुलिस दांगाईयों को भगाने में कोई साथ नहीं दे रही थी। चूंकि वानर सेना भारत माता के साथ दिल्ली पुलिस की भी जयकारा लगा रही थी इसलिए मुझे लगा हो सकता है दोनों के मध्य कोई रिलेशन बन गया। वैसे भी बड़ाई करने वालों के साथ उसके साथ कड़ाई से पेश आना अच्छी बात नहीं है।

चूंकि पुलिस मैनुअल का ज्यादा ज्ञान नहीं है इसलिए मैं दिल्ली पुलिस को जज करने का मसला  आप लोगों पर ही छोड़ देता हूं।

मुझे तो यही लग रहा था कि लोग, पुलिस, नेता फिल्मों में दंगा देखते देखते बोर हो गए थे तो सोच लिया होगा कि एक दो रियल सीन आजमा लेते हैं।

वैसे भी आजकल थिंकर लोगों से समाज अटा पड़ा है।

लोगों के पास ज्यादा काम है नहीं, रोजगार नए आ नहीं रहे हैं, अधिकतम सरकारी पैसा वैसा तो ट्रंप जैसे लोगों पर ही खर्च होना है, स्टंट मेन हीरो अक्षय कुमार दिख नहीं रहे, इंटरनेशनल मीडिया चीन के कोरॉना वायरस और सीरिया में अटा पड़ा है।

हमारे यहां कपिल मिश्रा, ओवेसी बंधु, गिरिराज सिंह,अमित शाह, दिग्गी, मनीष तिवारी, आदित्यनाथ जैसे महापुरुषों की कमी है नहीं।

1984, गोधरा… आदि दंगे हुए काफी दिन हो गए। हो सकता है भारत की इज्ज़त को विश्व में मान दिलाने के लिए इनमें से कुछ महापुरुषों ने दंगों का प्लान कर दिया हो।

 क्या पता इससे भारत की आबादी कम हो जाए और ये रातों रात सोने की चिड़ियां फिर से बन जाए।

संभावनाएं काफी है, क्योंकि आज़ादी के इतने वर्षों बाद पहली बार भारत को बाहुबली और अंतरराष्ट्रीय छवि वाला प्रधानमंत्री मिला है और निराश होने की जरूरत नहीं है।

तीन युद्ध हारने वाला पाकिस्तान हमसे जीत नहीं सकता, चीन कोरोना के कारण पस्त और अमेरिकी राष्ट्रपति भारत में मस्त है।

फिलहाल मैं सड़क पर दिख रहे उन तमाम सशस्त्रधारी वीरों को नमन करना चाहता हूं जिन्होंने मुझे सही सलामत अंकुर विहार आने दिया। उनको सांत्वना देना चाहता हूं जिनकी गाड़ियां जला दी गई, अपूरणीय क्षति हुई।

कई किताबों में लिखा है कि भारत भगवानों को देश है और ज्यादातर चीजें भगवान भरोसे ही होती है। इसलिए सीधे भगवान से सिफारिश किजिए। क्योंकि सरकारों ने संविधान को लाइब्रेरी में सजा के रखने योग्य बना दिया है…. वैसे मेरी सलाह को मानने की आवश्यकता नहीं है,??????

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