रायपुर। पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना चुके देवेश तिवारी ने गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की कुलपति अंजिला गुप्ता के नाम एक खुला पत्र लिखा है। देवेश ने हाल ही में हो रहे विश्वविद्यालय में प्रोफेसर की भर्ती पर सवाल उठाए है।

देवेश लिखते हैं,

प्रिय अंजिला गुप्ता
माननीय कुलपति महोदया, गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर छत्तीसगढ़

मैं आपके विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र हूं, विश्वविद्यालय में मैं 2011 बैच में प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान पर रहा हूं, तब के वीसी लक्ष्मण चतुर्वेदी और जस्टिस खरे ने मुझे गोल्ड मैडल दिया। एक जज के हाथ से पदक लेकर न्याय की बात न करूं तो यह विश्वविद्यालय की महान विरासत और मेरे बुजुर्गों की धरोहर का अपमान होगा। 2013 में विश्विद्यालय के पत्रकारिता विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर की पोस्ट आई थी, उसमें बड़ी आसानी से बहुत से प्रतिभागियों को अयोग्य ठहरा दिया गया वह मामला न्यायालय में लंबित है। कल फिर आप इसी पोस्ट के लिए इंटरव्यू कंडक्ट कर रही हैं। इस बार भी देश भर के कई केंद्रीय विश्वविद्यालय के 50 से अधिक महान विद्वानों ने फार्म भरा था। मगर फिर स्क्रूटनी में आपने छग के राज्य विश्विद्यालय कुशाभाऊ ठाकरे के 3 और 1 संघ बैग्राउंड वाले अमरकंटक वाले गुरुजी का चयन किया है। जबकि इन चारों से कई गुना हुनरमंद, रिसर्च पेपर प्रकाशित, जेआरएफ, नेट क्वालिफाइड प्रोफेसर्स ने अप्लाई किया है। फिर क्या कारण है कि साक्षात्कार यही 4 लोग देंगे।
एल्युमिनाई छात्र होने के नाते आपको मुफ्त की सलाह है। आप मेरे विश्वविद्यालय में जब प्रोफेसर्स भर्ती निकालें तो पढ़ाई और मैरिट का मानक लिखना छोड़ दीजिए, और साफ लिखिए कि, संघ की शाखा में लाठी भांजने का अनुभव हो, खाकी हाफ पैंट दिखाने पर नौकरी पक्की।
क्यों ढोंग करती हैं मेरिट का। आप कितने होनहार छात्रों के प्रोफेसर्स बनने का सपना मार रही हैं, जिन्हें लगता है योग्यता पूरी करने से उन्हें जॉब मिलेगी। वो भूल जाते हैं कुलपति अंजिला गुप्ता की तरह हो तो शाखा वाले को ही जॉब मिलेगी।
आपके विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र
देवेश तिवारी
2009 to 2011 बैच , पत्रकारिता विभाग
पूर्व छात्र इस पोस्ट को शेयर करें ताकि खुला पत्र उन तक पहुंचे

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