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माननीयों की अनुशंसा से हर महीने मेकाहारा हॉस्पिटल को हो रहा लाखों रुपये का घाटा

रायपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल भीम राव आंबेडकर अस्पताल में इस समय मंत्री, विधायकों और सांसद जैसे माननीयों की अनुशंसा के चलते हर महीने घाटे में चल रहा है। यह घाटा छोटी-मोटी रकम नहीं बल्कि प्रतिमाह पंद्रह लाख का हो रहा है। प्रदेश में सालों से चले आ रहे इस अनुशंसा पत्र के सिस्टम के लिए नियमों में कोई प्रावधान नहीं है, ऐसे में इस घाटे से उभरने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने माननीयों से पत्र नहीं लिखने की अपील की है। हालांकि प्रबंधन ने यह भी कहा है कि “जिन मरीजों के पास सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का कोई जरिया नहीं है और जिन्हें जरुरी है, उन्हीं को अनुशंसा पत्र प्रदान करें।

20 नवंबर 2019 को आदेश के बाद (DKS) दाऊ कल्याण सुपरस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में भी मंत्री, विधायकों और सांसद की अनुशंसा को बंद कर केवल मुख्यमंत्री की अनुशंसा को ही पात्रता दी गई थी।  इसकी पीछे तर्क यह दिया गया था, कि अस्पताल प्रबंधन की माली हालत ठीक नहीं है। ऐसे में माननीयों की अनुशंसा को खत्म का मुख्यमंत्री की अनुशंसा पर ही इलाज करने की बात कही गई थी।

हालांकि आंबेडकर अस्पताल में राशन कार्ड और आयुष्मान भारत कार्ड से इलाज होता है, और अभी तत्काल प्रभाव से माननीयों की अनुशंसा को बंद भी नहीं किया गया है। केवल उन्हें कहा गया है कि जो सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए पात्र नहीं केवल उन्हें ही अनुशंसा पत्र दिया जाए। अस्पताल प्रबंधन के इस निवेदन के बाद काफी हद तक नुकसान से बचा जा सकेगा।

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