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तो इसलिए सोशल मीडिया चैट्स पर सरकार रखना चाहती है नजर

रायपुर। ट्वीटर फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, यू ट्यूब , व्हाट्सएप से सरकार जब चाहे आपका निजी डेटा मांग सकती है और इन कंपनियों को आपका डेटा उन्हें देना होगा। सरकार इसके लिए नियम लाने जा रही है। सरकार का तर्क है कि, ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि, फेक न्यूज, चाइल्ड पोर्नोंग्राफी पर लगाम लगाया जा सके। हालांकि एक सत्य यह भी है कि, सरकार के मंत्री ही फेक न्यूज शेयर करने और फैलाने के मामले में जलील हो चुके हैं।

 खैर इंटरनेट से जुड़ी संस्था ट्रेडग्रुप इंटरनेट एंड मोबाईल एसोसिएशन ने इसका विरोध किया है। निजता के अधिकार के हनन को लेकर सुप्रिम कोर्ट ने भी कई बार सरकार को और सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिए हैं। इसी को आधार मानते हुए सोशल मीडिया से जुड़ी कंपनियां सरकार को आपका निजी डेटा प्रोवाईड कराने मना कर रही हैं।

फेक न्यूज और वायरल कंटेट को लेकर कंपनियां पहले से सख्त हुई हैं। एक ही मैसेज को कई समूह में लगातार भेजे जाने पर वाट्स्एप आपके नंबर को ब्लॉक कर सकता है। इसके अलावा फेसबुक फेक न्यूज, न्यूड फोटो और हिंसक कंटेट पर वॉर्निंग दे रहा है।

यदि सरकार इस दिशा में सफल हो जाती है तो आपका चैट, इंटरनेट कॉल, वीडियो कॉल कुछ भी निजी नहीं रह जाएगा। यानि आपके निजता के अधिकार का उल्लंघन होना तय है। इसका असर सोशल मीडिया कंपनियों के युजर्स पर भी पड़ेगा जो अपनी बातचीत को निजी मानकर इसमें चैटिंग या कॉल करते हैं। इनके युजर्स की संख्या कम हो सकती है।

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