पढ़ने लायक

फिर आंदोलन की राह पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता -सहायिका, धरना देकर सरकार को याद दिलाएंगी वायदे

रायपुर। बात तब की है जब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की लहर चल रही थी। तृतीय वर्ग कर्मचारी आन्दोलन पर आन्दोलन कर रमन सरकार, हाय-हाय कह रहे थे। उस वक्त तब के कांग्रेस अध्यक्ष और अब के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उनके समर्थन में रायपुर के धरना स्थल जाया करते थे, और कहते थे… आप की मांग जायज है.. सरकार को आपकी मांग मानना चाहिए “ हम अगर सत्ता में आयेंगे तो आपकी मांग पूरी करेंगे।

साल 2018 के गर्मी में भी एक ऐसा ही आंदोलन हुए था, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताऔर सहायिका अपनी मांगों को लेकर आंदोलन में उतरी। सरकार से सीधे टक्कर लेते वे 50 दिन तक आंदोलनरत रही। इस दौरान भूख हड़ताल करते हुए वे कई बार गिर पड़ी, अस्पताल गई…लेकिन, अडी रही। अंत में रमन सरकार ने उनकी मांगों को पूरा करने का अस्वासन दिया और आन्दोलन ख़त्म कर काम पर लौटने कहा। फिर कुछ महीने बाद राज्य में चुनाव हुए और रमन सरकार से नाराज कर्मचारियों ने रमन सिंह को सत्ता से उखड फेंका और प्रदेश में कांग्रेस की भूपेश सरकार शासन में आयी।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के गर्मी में हुए इस आंदोलन में भूपेश बघेल ने आंदोलन का समर्थन किया था और उनकी मांगों को वाजिब ठहरते हुए सत्ता में आने के पश्चात मांग पूरी करने का वायदा किया था। प्रदेश में राज्य की भूपेश सरकार को एक वर्ष से ज्यादा हो गया है। ऐसे में मांग पूरी नहीं होने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताऔर सहियका एक बार फिर आंदोलन की राह पर है। वे बजट सत्र से पहले सरकार का ध्यान अपनी ओर केंद्रित करना चाहती है।

बुधवार को इसे लेकर सप्रे स्कूल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताऔर सहियकों के प्रतिनिधि मंडल ने बैठक की। बैठक को लेकर संघ की प्रांत उपाध्यक्ष भुवनेश्वरी तिवारी ने बताया कि यह बैठक महज सरकार को एक चेतावनी है। सरकार ने अगर हमारी सुध नहीं ली तो बैठक कर आंदोलन की तारीख निकालेंगे।

क्या थी मांग

  • शासकीय कर्मचारी घोषित करने तक कलेक्टर दर लागू हो।
  • हड़ताल अवधि का मानदेय तत्काल दिया जाये।
  • सेवा समाप्ति की बाद कार्यकर्ता को 5 लाख एवं सहायिकाओ को 3 लाख दिया जाये।
  • पूर्व में लागू सेवा समिति के बाद कार्यकर्ता को 50 हजार सहायिकाओ को 25 हज़ार दिया जाये।
  • युनिफॉर्म में साड़ी के बजाए ब्लेजर दिया जाये।
  • अन्य विभागों का कार्य नहीं लिये जाने पर अलग से मानदेय दिया जाये।
  • 01 अक्टूबर 2018 से जो 1500 बढ़ा है। उसका आज तक का एरियस दिया जाये।
  • मिनी आंगनबाड़ी को पूर्ण आंगनबाड़ी में किया जाये साथ ही सहायिकाओ को गैस-सिलेण्डर दिया जाये।
  • सभी जिलो में कार्य संचालन हेतु मोबाईल दिया जाये।
  • एक ही स्थान पर 5 वर्ष से अधिक कार्यरत पर्यवेक्षकों का स्थांतरण एवं स्व सहायता समूहों का बदलाव किया जाये।
  • सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लिखित में चार बिन्दुओ पर चर्चा कर सहमति बनी है, उसे लागू किया जाये।

यह भी पढ़ें

https://topchand.com/tributes-paid-to-martyred-soldiers-in-raipur-in-bijapur-encounter/

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.