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वन विभाग को सता रहा है वनभैंसों की कमी, बस्तर में होगी इनकी गणना

रायपुर। छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वन भैसा विप्लुप्ती के कगार पर है। ऐसे में इसकी चिंता वन विभाग को खाई जा रही हैं। जिस तेजी से वन भैंसा विलुप्त हो रहे हैं यह कहना गलत नहीं कि आने वाले समय में अपनी पुश्तों को तस्वीर में ही अपने राजकीय पशु को दिखने की नौबत आ जाएगी।


इस लिहाज के वन विभाग वन भैंसों के संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाने जा रही है। इसके लिए वन विभाग ने बस्तर के इंद्रावती बाघ अभ्यारण्य में वन भैंसों की गिनती कराने जा रही है। विभागीय अधिकारी इसकी तैयारी में जुटे हुए है। अप्रैल में इसे शुरू किया जाने की योजना बनाई गई है।


स्थानीय ग्रामीणों और ट्रैप कैमरा की मदद से गणना का काम किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को सौंपी जाएगा। अब तक माओवादियों की दहशत से वन पशुओं की गणना नहीं की गई है। ऐसे में यह पहली दफा होगा जब यहां पर गणना होगी।


वन विभाग को उम्मीद हैं कि यहां वन भैंसों की बड़ी तादाद में मौजदगी होगी। गरियाबंद के सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य और जंगल सफारी में अभी मात्र 11 वन भैंसे है। लगातार सिमट रही संख्या को देखते हुए वन विभाग द्वारा उनके संरक्षण और संवर्धन की योजना बनाई गई है।

राज्य में राजकीय पशु वनभैंसा की घटती संख्या को देखते हुए, असम से मादा वनभैंसा लाने की तैयारी की जा रही है । असम के मानस नेशनल पार्क से 5 मादा वनभैसें छत्तीसगढ़ लाई जायेंगी।


असम के मानस नेशनल पार्क से लाये जा रहे वनभैंसों को बारनवापारा अभ्यारण में रखा जाएगा । इसके लिए अभ्यारण में 10 एकड़ की जगह में बाड़ा तैयार किया जा रहा है, इन्हें सड़क मार्ग से लाने की योजना है। वर्तमान में प्रदेश में मादा वनभैसों की संख्या मात्र दो है ।

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