रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का आज विशेष सत्र है। इस सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होनी थी, लेकिन जब तक राज्यपाल अनुसुइया उईके अपना अभिभाषण पढ़ती उससे पहले ही भारतीय जनता पार्टी और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के विधायकों ने सदन से वाकआउट कर दिया। इसके बाद राज्यपाल अनुसुइया उईके ने अपना अभिभाषण ख़त्म कर दिया। राज्यपाल के अभिभाषण के बाद दोपहर एक बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया।  

दरअसल विपक्ष के विधायक इस लिए नाराज थे कि सिर्फ एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर उन्हें राज्यपाल के अभिभाषण कराने और उसके चर्चा के लिए नियम मुताबिक वक्त नहीं दिया जा रहा, वहीं चर्चा में भी भाग नहीं लेने का फैसला लिया।

बीजेपी की तरफ से बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ये एक गलत परंपरा की शुरुआत है और वो इस परंपरा का हिस्सा नहीं बन सकते। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि उनकी पार्टी ना तो अभिभाषण में और ना ही चर्चा में भाग लेगी। वहीं जोगी कांग्रेस की तरफ से भी राज्यपाल के अभिभाषण से वाकआउट कर दिया। अजीत जोगी ने कहा कि ये बेहद गलत परंपरा की शुरुआत हो रही है। देश में कभी भी ऐसा नहीं हुआ, इसलिए वो इस अभिभाषण में हिस्सा नहीं लेंगे।

दोपहर 1 बजे के बाद सदन में एससी/एसटी एक्ट के समयावधि बढाने के लिए चर्चा होगा। यह विशेष सत्र इसी के लिए बुलाया गया है। राज्य सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले आरक्षण की समयावधि बढ़ाने की अनुसंशा करेगी। विधानसभा में अजा और अजजा वर्ग के लिए आरक्षण व्यवस्था को दस वर्ष बढ़ाए जाने की अनुशंसा कर केंद्र सरकार को भेजेगी।

राज्य में एसटी/एससी का आरक्षण ख़त्म होने वाला है, जिसे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से यह विशेष सत्र बुलाया गया है। दरअसल यह एक संवैधानिक व्यवस्था है जिसके तहत प्रत्येक दस वर्ष में आरक्षण की समीक्षा हो और आवश्यक होने पर इसे बढ़ाया जाए, इसके लिए हर राज्य समीक्षानुरुप अनुशंसा करता है। और जैसी कि परंपरा रही है आरक्षण की समयावधि दस वर्ष के लिए हर बार बढ़ जाती है।

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