जशपुर। छत्तीसगढ़ में होनहार छात्रों की कमी नहीं है, ये बच्चे मजबूरियों की घूट पीकर संघर्ष के साथ अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। लेकिन कई बार उनके हौसले को गहरा धक्का लगता है जब इनको मिलने वाली सुविधा इन तक पहुंच नहीं पाती।

आज ऐसे ही एक बच्चे की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग है, लेकिन उसके हौसले को देख आप भी उसे सलाम करना चाहेंगे।

ये कहानी है आदिवासी समुदाय से आने वाले 12वीं कक्षा के आशेश्वर राम की..जो रोज 12 किलोमीटर का सफ़र तय करके अपने स्कूल तक पढ़ने जाता है। आशेश्वर राम को स्कूल आने-जाने में रोज 24 किलोमीटर तक का मशक्क्त करना पड़ता है। वह रोज सुबह जल्दी अपने घर से निकलता है और हाथ गाड़ी की मदद से रुकते सुस्ताते हुए अपने स्कूल पहुंचता है और फिर पढाई ख़त्म कर वापस लौट आता है। इस दिन भर की थकान के बावजूद आशेश्वर राम घर आकर भी पढाई करता है।

आशेश्वर राम जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक के ग्राम जुरुडाँड पंचायत का रहना वाला है। उसका कहना है कि अगर उसे समाज कल्याण विभाग की ओर से ई-ट्राईसाइकिल मिल जाता है तो उसको स्कूल जाने में सुविधा होगी और वह अच्छी तरह से पढ़ कर परीक्षा में अच्छे अंक लाएगा।

इस दिव्यांग छात्र आशेश्वर राम ने बताया की कुछ महीने पहले जशपुर के कलेक्टर साहब से आवेदन के साथ मिला था। उन्होंने जशपुर समाज कल्याण विभाग को ई-ट्राइसाइकिल तत्काल उपलब्ध कराने को कहा था, वहीं समाज कल्याण विभाग ने उसे यह कह दिया कि विभाग से मिलने वाला जशपुर में अभी ई-ट्राइसाइकिल खत्म हो गया है, परीक्षा से पहले दिलवा देंगे। जाहिर है अब छात्र का परीक्षा 2 मार्च से प्रारंभ होने वाला है, और उसके सामने समय पर परीक्षा में पहुंचने की चुनौती है। अब देखना होगा कि प्रशासन आशेश्वर राम को समय रहते ई-ट्राईसाइकिल मुहैया करवा पाता है, या नहीं !

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