कोरबा। प्रदेश भर में छेराछेरा तिहार की धूम है, सुबह से ही बच्चे हाथों में टोकरी लिए छेरछेरा मांगने निकल रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम भी सुबह-सुबह छेरछेरा मांगने के लिए निकले। मोहन मरकाम कोरबा जिला के  ग्राम वेला की गलियों में घर-घर जाकर छेरछेरा मांगते हुए दिखाई दिया।

छत्तीसगढ़ में यह पर्व नई फसल के खलिहान से घर आ जाने के बाद मनाया जाता है। इस दौरान लोग घर-घर जाकर लोग अन्न का दान माँगते हैं। वहीं गाँव के युवक घर-घर जाकर डंडा नृत्य करते हैं।


लोक परंपरा के अनुसार पौष महीने की पूर्णिमा को प्रतिवर्ष छेरछेरा का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सुबह से ही बच्चे, युवक व युवतियाँ हाथ में टोकरी, बोरी आदि लेकर घर-घर छेरछेरा माँगते हैं। वहीं युवकों की टोलियाँ डंडा नृत्य कर घर-घर पहुँचती हैं। धान मिंसाई हो जाने के चलते गाँव में घर-घर धान का भंडार होता है, जिसके चलते लोग छेर छेरा माँगने वालों को दान करते हैं।
इन्हें हर घर से धान, चावल व नकद राशि मिलती है। पहले इस पर्व में सिर्फ धान ही दिया जाता था, बाद में चावल और पैसे भी दिए जाने लगा। इस त्योहार के दस दिन पहले ही डंडा नृत्य करने वाले लोग आसपास के गाँवों में नृत्य करने जाते हैं। वहाँ उन्हें बड़ी मात्रा में धान व नगद रुपए मिल जाते हैं। इस त्योहार के दिन कामकाज पूरी तरह बंद रहता है। इस दिन लोग प्रायः गाँव छोड़कर बाहर नहीं जाते।

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