नॉलेजवीडियो

सतत विकास लक्ष्यों में क्या कहता है छत्तीसगढ़ का रिपोर्ट कार्ड

रायपुर। पूरे भारत में छत्तीसगढ़ आज भी आर्थिक रूप से सबसे कमजोर राज्य है। यह कहना है नीति आयोग का। हाल ही में नीति आयोग ने 2019 के Sustainable Development Goals यानी की सतत विकास लक्ष्य के आंकड़े जारी किए हैं। इसके अनुसार आज भी छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा गरीबी है। 

पर ये Sustainable Development Goals क्या बला है? आइये जानते हैं। यूनाइटेड नेशंस द्वारा सम्पूर्ण विकास के लिए तय किये गए 17 मानक हैं। इसके अंतर्गत, गरीबी उन्मूलन, जीरो हंगर, अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा की गुणवत्ता, लैगिंक समानता, स्वच्छ पानी और स्वच्छता, किफायती एवं स्वच्छ ऊर्जा, आर्थिक विकास, उद्योग/निर्माण एवं बुनियादी ढांचे, असमानता को कम करना, स्थायी शहर और समुदाय, स्थायी खपत और उत्पाद, जल वायु, जल के भीतर जीवन, धरती पर जीवन, शांति न्याय और मजबूत संस्थान, पार्टनरशिप याने की भागीदारी शामिल है। इन सभी 17 बिंदुओं पर सरकारें साल भर कार्य करती है और अंत में अपना राज्यवार रिपोर्ट कार्ड तैयार करती है।

इसकी रिपोर्ट नीती आयोग ने हाल में जारी की है। अब आइए देखते हैं क्या रहा छत्तीसगढ़ का परफॉर्मेंस तो भैया अपन फिर से हो गए हैं फिसड्डी, एवरेज मार्क्स आये हैं, कहीं ग्रेस मिला है तो कुछ बिंदु ऐसे भी है जिसमें हम बाकियों की तुलना में स्मार्ट निकले।। सबसे पहले गरीबी उन्मूलन। पूरे भारत में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले, सबसे ज्यादा लोग हमारे प्रदेश में रहते हैं। प्रदेश की 39।93 प्रतिशत आबादी यानी एक करोड़ से ज्यादा लोग आज भी गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। इसमें पिछले एक साल में 1 प्रतिशत की कमी आयी। अब बात करते हैं जीरो हंगर या भुखमरी से मुक्ति की, तो इसमें भी हमारा हाल खस्ता है। इस मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में 27वें स्थान पर है, या सबसे नीचे के पायदान पर चौथे नम्बर पर है। चौकाने वाले आंकड़े यह कहते हैं कि अभी भी छत्तीसगढ़ में पाँच साल के कम उम्र के 35.4% बच्चे कुपोषित हैं ।

15 से 49 साल तक कि गर्भवती महिलाओं में 41.5% महिलाएं एनिमिया याने की खून की कमी पायी गयी हैं। वहीं 6 से 59 माह के शिशुओं में 40.8% बच्चे भी एनीमिया के शिकार हैं। 0-4 साल तक के बच्चों में 40% बच्चों का वजन, औसत वजन से भी कम है। यह आंकड़े बहुत ही गंभीर हैं छत्तीसगढ़ को इस क्षेत्र में अभी बहुत अधिक काम करने की जरूरत है। गुड हेल्थ एन्ड वेल बीइंग याने की अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण के मामले में यदि हम देखें तो प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं की मृत्यु की दर 141 है। वहीं पूरे भारत में यह दर 122 है। शिक्षा गुणवत्ता की हम बात करें तो 6 से 13 साल के बच्चों में 3.75% बच्चे आज भी स्कूल से दूर हैं वहीं सेकंडरी लेवल याने की 10वीं तक के बच्चों में स्कूल छोड़ देने का औसत पिछले साल की तुलना में बढ़ गया है जोकि 2018 में 21.26 प्रतिशत था अब 24.23% हो गया है एक साल में 3% का इजाफा एक बड़ा आंकड़ा है।

अब बात करते हैं जेंडर इक़्वालिटी याने की लैंगिक समानता की। इस बिंदु पर जन्म के समय लिंगानुपात के मामले में यह कहा जा सकता है की ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’। प्रति 1000 बेटों पर छत्तीसगढ़ में 961 बेटियां हुई हैं जो की देश में सबसे अधिक है। स्वच्छ पानी और स्वच्छता के मामले में छत्तीसगढ़ ने बेहतर प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट कहती है जहाँ एक तरफ देश की 60 करोड़ आबादी रोजमर्रा में पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर जूझ रही है वहीं छत्तीसगढ़ के घरों में 95।20% पेयजल श्रोतों को दुरुस्त कर लिया गया है। प्रदेश के सभी जिले सरकार के अनुसार ODF याने की खुले में शौच मुक्त हो चुके है । इन सभी मामलों में 92 अंको के साथ छत्तीसगढ़ 6वें रैंक पर है।

रिपोर्ट यह भी दावा करती है की प्रदेश में 99.67% घरों तक बिजली पहुँच गयी है। वहीं 40।6% घरों में एलपीजी गैस से खाना पकाया जाता है। इस बीच एक उपलब्धि राज्य सरकार के खाते में भी जाती है। प्रदेश में इकोनॉमिक ग्रोथ में जबरदस्त इजाफा देखा गया है। जहाँ 2018 में छत्तीसगढ़ 22वें स्थान पर था अब 67 अंको के साथ 14 वें रैंक पर है याने मंदी के असर से छत्तीसगढ़ बचा रहा ऋण माफी जैसे फैसले असर दिखा रहे हैं। यह थी नीति आयोग की रिपोर्ट जिसमें छत्तीसगढ़ के परफॉर्मेंस के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को हमने आपके सामने रखे हैं यह जानकारी हमें नीति आयोग के वेबसाइट नीति डॉट जीओवी डॉट इन के जरिए इकठ्ठी की है। इस वेबसाइट में देश प्रदेश के अन्य रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.