पढ़ने लायक

​जिसका झूठ सीएम ने पकड़ा था, वही स्वयंभू एक्टिविस्ट दारू पीकर तेज गाड़ी चलाते धराया। पुलिस से बद्तमिजी में गया जेल

रायपुर,
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 26 नवंबर को​ ​ट्विटर पर एक पोस्ट डाली, जिसमें उनके खिलाफ फैलाए गए झूठ का पर्दापाश किया गया था। एक कथित सामाजिक कार्यकर्ता भूपेंद्र सिंह ने उद्धव ठाकरे के नाथूराम देशभक्त बताने वाली फोटो के साथ सीएम बघेल का ट्विट फोटोशॉप से जोड़कर शेयर किया था। सीएम ने खुद इसे पकड़ा और बताया कि, यह भाजपा शासित प्रदेश नहीं है इसलिए अभिव्यक्ति की आजादी है। एक नौजवान साथी ने फोटोशॉप करके यह पोस्ट किया है, कृपा करके झूठ न फैलाएं सकारात्मक आलोचना करें।
इस झूठ को फैलाने के बाद यह कथित सामाजिक कार्यकर्ता लगातार झूठ फैलाने वाले पोस्ट करता रहा। एनडीटीवी के हवाले से इसने सीएम को बाहरी बताने वाले फर्जी पोस्ट भी शेयर किए। मगर इसके खिलाफ किसी ने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई।
नए साल के जश्न में इस कथित सामाजिक आरटीआई कार्यकर्ता ने छककर शराब पी और नशे में धुत होकर गाड़ी चला रहा था, तभी रूटिन चेकिंग में लगी पुलिस ने इसे पकड़ा। जब इस सामाजिक कार्यकर्ता को पकड़ा गया तो दारू मापने वाली मशीन में इसनें फूंक टेस्ट देने से मना कर दिया। इसके बाद वहां मौजूद पुलिस वालों से इसकी हुज्जत हुई। आरटीआईकार्यकर्ता का रौब दिखाते हुए इसने पुलिस को धमकाया। मगर इसकी एक न चली। पुलिस के काम में बाधा पहुंचाने जैसे जुर्म में इसे जेल दाखिल कर दिया गया है।
इस घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने फैसबुक पर , पूर्व सीएम और पूर्व संविदा प्रमुख सचिव के बिना सरनेम लिखे, केवल नाम लिखकर इसे उनका एजेंट बताया। उन्होंने कलेक्टर की नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ चुके एक आदमी के लिए इसे काम करने वाला बताते हुए इसकी जमानत न लेने पर व्यंग किया।
दिलचस्प यह है कि, भूपेंद्र सिंह नाम का यह स्वयंभू आरटीआई कार्यकर्ता कुछ समय पहले तक रमन सरकार के दौरान शराबबंदी को लेकर आंदोलन करता था, जो आज शराब पीकर पुलिस के बद्तमिजी करते गिरफ्तार हुआ है। इसी भूपेंद्र सिंह ने रमन राज मे केवल बृजमोहन अग्रवाल के जलकी जमीन कब्जा मामले में माहौल बनाया था। तब किसके ईशारे पर बृजमोहन टारगेट होते थे यह यदि आपको पता है तो यह समझते देर नहीं लगेगी कि, इस स्यंभू सामाजिक कार्यकर्ता का रिमोट कंट्रोल किसके पास रहा है। खैर ​समाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला का कहना है कि, छत्तीसगढ़ में ऐसे बहुत से लोग हैं जो किसी के ईशारे पर आरटीआई जैसे पवित्र एक्ट की आड़ में अपना एजेंडा सेट करते हैं। ऐसे लोगों से सामाजिक कार्यकर्ताओं की छवि धुमिल होती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.