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जो जिन्दगी की जंग हार कर भी जीत गया …..

हार कर भी जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं, एक हिंदी फिल्म का यह डायलोग शेख गफ्फार साहब पर पूरा फिट बैठा

कल जब नगरीय निकाय चुनावों का परिणाम आया तब बिलासपुर नगर निगम वार्ड -29 से शेख गफ्फार साहब के जीत की खबर भी आई… लेकिन निर्दयी किस्मत का खेल देखिये इस जीत को देखने के लिए गफ्फार साहब ही जीवित नहीं थे… सोमवार सुबह उनका देहांत हुआ और मंगलवार को उनकी जीत का ऐलान…

चुनाव प्रचार के दौरान हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई थी…

शेख गफ्फार ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजेश रजक को चौबीस सौ चार मतों से हराया.

गफ्फार सहाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व बीडीए अध्यक्ष व पूर्व उप महापौर रहे थे…

1983 में जब बिलासपुर नगर निगम बना तब गफ्फार साहब पहली बार पार्षद चुने गए थे। उन्हें डिप्टी मेयर भी बनाया गया था। उसके बाद 1994 में उन्हें बीडीए का चेयरमैन बनाया गया। वे 1998 तक दो बार चेयरमैन रहे। 2000 से 2005 तक वो फिर पार्षद रहे थे। इसके बाद वे कांग्रेस संगठन में अलग-अलग पदों पर काम करते रहे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अध्यक्ष रहते हुए प्रदेश कार्यकारिणी में उन्हें जगह दी थी।

आज शेख गफ्फार हमारे बीच हैं नहीं लेकिन तोपचंद उनकी जीत के लिए उन्हें सलाम करता है।

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