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अन्धविश्वास की समाधि: पिछले 5 सालों से ले रहे थे समाधि, पर इस बार ली तो उठे ही नहीं..अब होगा अंतिम संस्कार

महासमुंद। आस्था जब अंधविश्वास के रूप लेती है तो कई बार जान देकर उसकी कीमत चुकानी पड़ती है। ऐसा ही उदाहरण छत्तीसगढ़ के महासमुंद में देखने को मिला। सतनामी समाज के कथित बाबा ने अंधविश्वास के चलते अपनी जान खो दी। दरअसल संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास की जयंती के अवसर पर बाबा ने 5 दिन की समाधि ली थी, लेकिन जब अंतिम दिन बाबा को समाधि से निकालने उनके भक्त गाजे-बाजे के साथ पहुंचे तो बाबा की दम घुंटने से मौत हो चुकी थी। इसके बाद उनके भक्तों में शोक की लहर दौड़ उठी।  

महासमुंद जिले के ग्राम पचरी गांव का है, 30 वर्षिय चमनदास जोशी पिछले पांच सालों से ये खतरनाक समाधी ले रहा था। इस समाधि में उसने पहले साल 24 घंटे, दूसरे साल 48 घंटे, तीसरे साल 72 घंटे, चौथे साल 96 घंटे की समाधी ली थी। सामधी लेने के बाद हर साल किसी तरह जान बच जाने की वजह से इस बार 16 दिसंबर 2019 को 108 घंटों की समाधी के लिए 4 फिट गड्ढे में भुमिगत समाधी के लिए उतरा था। पर उसको और उसके भक्तों को क्या मालूम था कि अंधविश्वास की ये समाधी चमनदास को मौत के बाद ही बाहर निकालेगी। पांच दिन बाद जब चमनदास को जब गड्ढे से बाहर निकाला गया तब वह बेहोश था। जहाँ उसे उठाकर जिला चिकित्सालय लाया गया लेकिन महासमुंद जिला अस्पताल में जांज के बाद चिकित्सकों नें उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के भाई का कहना है कि हमने लंबे समय तक समाधि लेने को मना किया था लेकिन नही माना और जान गवा दी,वहीं चिकित्सक ने बताया कि जमीन के अंदर ऑक्सीजन की कमी के  वजह से दम घुटने से उसकी मौत हुई होगी।

बाबा गुरु घासीदास जीवन भर कुप्रथा और अंधविश्वास के लिए लोगों को जागरूक किया, गुरु घासीदास उस दौर में भी साइंटिफिक थे। लेकिन, उनकी आस्था में डूबे बाबा चमनदास जोशी के दिल में यह अंधविश्वास बन गया था। और इसके चलते उसकी मौत हो गयी। यह घटना हर उस इंसान के लिए सिख है, जो ऐसी अंध भक्ति में लीन होकर इस तरह का करतब दिखा कर खुद को बाबा कहलाना चाहते हैं।  

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