रायगढ़ । गम के आंसू आपने सुने होंगे.. इन दिनों देश में गम के नहीं दाम के आंसू आ रहे हैं। प्याज अपनी प्रकृति के हिसाब से काटे जाने के दौरान आंसू का कारण बनता है। मगर दाम बढ़ जाए तो खड़ा प्याज भी सरे बाजार आंसू निकाल सकता है। प्याज धीरे—धीरे सब्जियों, सलाद, रसोई से गायब हो रहा है। हालात ये है, कि आज किसान से लेकर आम आदमी तक प्याज का विकल्प ढूंढ रहा है। देश के गुपचुप से लेकर चाट के शौकिन मूली में प्याज का​ विकल्प देख रहे हैं। मगर मूली लंबा होता है और प्याज गोल। लिहाजा डिश से स्वाद भी गोल हो चला है।

इस समय जो संकट है वह है। मगर छत्तीसगढ़ के कृषि वैज्ञानिकों के इस रिसर्च पर यदि अमल किया गया तो भविष्य में प्याज की मारामारी नहीं होगी। प्याज के इस संकट को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायगढ़ ने प्याज की वैरायटी में रिसर्च किया है। इस रिसर्च में प्याज की भीमा-शुभ्रा वैरायटी को छत्तीसगढ़ की आबोहवा के हिसाब से उपयुक्त पाया गया।

कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारियो ने बताया की “प्याज रबी में होने वाली फसल है, खरीफ में प्याज की खेती कम की जाती है। आपने देखा होगा बारिश खत्म होने के बाद जाड़े के मौसम में प्याज का संकट ज्यादा होता है क्योंकि, बारिश में प्याज उगाया नहीं जाता। बारिश में यदि प्याज की पैदावार हो तो इस संकट से निबटा जा सकता है। छत्तीसगढ़ में खरीफ के मौसम यानी बारिश में जब प्याज की भीमा शुभ्रा वैरायटी की फसल पर रिसर्च किया गया तो इसके सफल परिमाण मिले हैं। अगर किसान प्याज की इस फसल को लें तो प्याज की शॉर्टेज खत्म हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में प्याज की वैरायटी कौन कौन सी होती है, आइए जानते है।

भीमा शुभ्रा प्याज
इस वैरायटी को सफेद प्याज के नाम से जाना जाता है। यह प्याज खरीफ में 110-115 दिन में और पछेती खरीफ में 120-130 दिन में पककर तैयारी होती है। सेहत के लिए इसे बेहतर माना जाता है। दिखने में यह प्याज थायलैंड जैसे देशों में होने वाले प्याज ​की तरह दिखता है।

भीमा सुपर प्याज
इसे लाल प्याज के नाम से जानते है। प्याज की ये वैरायटी खरीफ में 22-22 टन और पछेती खरीफ में 40-45 टन तक उपज देती है। आम तौर कच्चे सलाद में लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। देसी वेरायटी में इसका साईज थोड़ा छोटा होता है लेकिन स्वाद रसीला और मजेदार होता है।

भीमा गहरा लाल
ये प्याज गहरे लाल रंग के चपटे एवं गोलाकार कंद होते है। खरीफ में इनकी 22-22 टन औसत उपज मिलती है और ये पकने में 95 से 100 दिन का समय लेते है। किचन में इस प्याज को ज्यादातर ग्रेवी बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।

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