पढ़ने लायक

उम्र 83 की, हौसला 25 का…जूनून की हद तक पढ़ाने का..

बिट्टू शर्मा, जांजगीर/चांपा। शिक्षक और शिक्षा इन दोनों के बीच का संबंध भी किसी प्रेम संबंध की तरह ही होता है, जिससे लगाव उम्र भर बना ही रहता है।

जैसे कहा जाता है,कि ज्ञान प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती, उसी तरह ज्ञान बांटने की भी कोई उम्र नहीं होती..

ऐसा ही कुछ प्रदेश के जांजगीर-चांपा जिले में हो रहा है, जहां एक रिटायर्ड शिक्षक, जिनकी उम्र 83 साल हो चुकी है, उनपर शिक्षा के प्रति ऐसा जुनून सवार है, कि वे रिटायर होने के बाद भी पिछले 19 सालों से गांव में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

83 की उम्र में भी वें नियमित सुबह-शाम दो-दो घंटे क्लास लेते है। और हर वक्त गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाने की कोशिश में लगे रहते है।

इनका नाम गोरेलाल पांडेय है, यह बम्हनीडीह ब्लाक के ग्राम पंचायत पचोरी के निवासी है। वें जिले ग्राम भारती के शिशु मंदिर में नियमित निशुल्क शिक्षा देते हैं।

पं. गोरेलाल पांडेय वर्ष 2000 में शिक्षक पद से रिटायर हुए, मगर 60 साल के उम्र में रिटायर होने के बाद वे लगातार 19 सालों से बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। शिक्षक गोरेलाल के शिक्षा के प्रति कूट-कूट कर भरी लगन को देखकर हर आदमी उनका प्रशंसक बन जाता है।

सुबह उठकर वे केवल शिक्षा के प्रति छात्र-छात्राओं को लगन की सीख देते हैं। उनके पढ़ाने की पद्धति को देखकर छात्र-छात्राएं भी आकर्षित होते है और दर्जनों छात्र सुबह शाम उनकी क्लास में अध्ययन करने पहुंचते हैं। पंडित गोरेलाल पांडेय के पढ़ाए बच्चे आज भी नवोदय विद्यालय, सैनिक भर्ती जैसे कई परीक्षाओं में पास होकर अच्छे स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। कई ऐसे गरीब बच्चे हैं, जो भारी भरकम फीस के चलते अच्छे स्कूलों में शिक्षा नहीं ले पाते, वें उन्हें आर्थिक मदद करने भी पीछे नहीं हटते। अपने पेंशन से मिली राशि से गरीब बच्चों की फीस की भरपाई भी करते है।

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