रायपुर। महिला सशक्तिकरण, महिला विकास, महिला समानता जैसे शब्द उस समय धुंधले पड़ जाते है, जब एक रिपोर्ट दावें से विपरीत हकीकत दिखाते हुए कहती है, कि भाइयों और बहनों पुरुष और महिलाओं के बीच आर्थिक असमानता का पैमाना भरने में 99 साल अभी और लगेंगे ।

जी हाँ! देश में महिला और पुरुषों के बीच आर्थिक समानता को लेकर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने एक रिपोर्ट पेश की है। जिसमें सीधे-सीधे यह बताया गया है कि आज भी देश महिला-पुरुषों की समानता में बाकी देशों से काफी पीछे है। 153 देशों की सूची में 112वें स्थान पर है।

यही नहीं पड़ोसी देश श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश भी हमसे काफी बेहतर स्थिति में है।

यह रिपोर्ट महिलाओं से जुडी सारी बातों को सिरे से नकराते हुए हवाहवाई बताता है। हकीकत तो यहीं है, कि आज भी महिलाएं आर्थिक रूप में पुरुषों से काफी पीछे है।

डब्ल्यूईएफ यह भी कहता है कि “स्वास्थ्य, शिक्षा, राजनीति, रोजगार में जो अंतर महिलाओं और पुरुषों के बीच है उसे पाटने में 99 साल और लगेंगे। जबकि इस रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं के लिए देश में आर्थिक अवसर मात्र 35% है।

यह रिपोर्ट एक बार फिर सवाल खड़े करती है.. कि जो महिलाएं, पुरुषों से बौद्धिक रूप में समान होती है वो आर्थिक रुप से पीछे क्यों है। आर्थिक अवसर जितना पुरुषों के पास है उतना महिलाओं के पास क्यों नहीं है।

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