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20 घंटे के धरने के बाद सरकार ने दिया आश्वासन, सारकेगुडा मामले में एक माह के भीतर होगा एफआईआर, आईजी ने कही ये बात!

बीजापुर। सारकेगुडा मामले की न्यायिक रिपोर्ट आने के बाद शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्त्ता हिमांशु कुमार और सोनी सोरी की अगुवाई में मृतकों के परिजन एफआईआर दर्ज कराने बासागुडा था पहुंचे। यहां थाने में एफआईआर दर्ज नहीं करने पर मृतक के परिजनों के साथ हिमांशु और सोरी धरने पर बैठ गए। तक़रीबन 20 घंटे के धरने के बाद शनिवार सुबह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा के आश्वासन के बाद धरने को स्थगित किया गया।

सरकार की ओर से विनोद वर्मा ने उन्हें आश्वासन दिया है कि एक माह के भीतर इस मामले आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया जाएगा। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो पीड़ितों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। बताते चले की इस मामले में पूर्ववर्ती सरकार और पुलिस विभाग के बड़े अफसर और गोली चलाने वाले जवानों पर फर्जी मुठभेड़ करने का आरोप है।

इधर, आक्रोशित मृतकों के परिजनों को मनाने पहुंचे बस्तर के प्रभारी आईजी पी सुंदरराज ने बताया कि इस मामले में पूर्व में FIR दर्ज है, चालान जमा हो चुका है, एक ही प्रकरण में दो FIR दर्ज कैसे होगी, फिर भी हम विधि विभाग से मार्गदर्शन मांगेंगे।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के सारकेगुड़ा गांव में 28 जून 2012 की रात सुरक्षाबलों ने 17 आदिवासी ग्रामीणों को माओवादी बताकर गोलियों से भून डाला था। इस दौरान गांववालों की ओर से किसी प्रकार की गोलीबारी नहीं की गई थी। ग्रामीणों के मुताबिक मारे गए लोग नक्सली नहीं थे, वे अपना पारंपरिक त्योहार बीज पंडुम मना रहे थे। मारे गए लोग नक्सली ही थे इस बात के सबूत सुरक्षाबल नहीं दे सके।

इन मौतों को लेकर तत्कालीन राज्य सरकार ने एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था। इस एक सदस्यीय जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विजय कुमार अग्रवाल बनाए गए। करीब सात साल की सुनवाई के बाद 17 अक्टूबर को यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक मारे गए लोग नक्सली नहीं, बेकसूर ग्रामीण आदिवासी थे।

हिमांशु कुमार आगे कहते हैं, ‘भाजपा सरकार ने सारकेगुड़ा को पूरी तरह से उजाड़ दिया था, जैसे-तैसे हमने इस गांव को बसाया, लेकिन जल्द ही इस गांव के 17 बेकसूर आदिवासियों को मौत के घाट उतार दिया गया। अब जबकि न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट सामने आ गई है, तब साफ-साफ दिख रहा है कि इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, तत्कालीन खुफिया चीफ मुकेश गुप्ता, बस्तर के आईजी टीजे लांगकुमेर, बीजापुर के पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल सहित अन्य कमांडिंग अफसर संलिप्त थे।

साथ ही हिमांशु कुमार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, खुफिया चीफ मुकेश गुप्ता सहित अन्य सभी जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर दर्ज होनी ही चाहिए। अगर ग्रामीण चाहेंगे कि सभी दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो तो वे ग्रामीणों के साथ प्राथमिकी दर्ज करवाने थाने अवश्य जाएंगे।

क्या हैं सारकेगुडा मामला बता रही हैं सामजिक कार्यकर्त्ता शालिनी गेरा

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