केन्द्रीय मंत्रालय की ओर से जारी एक रिपोर्ट में प्रदेश में पीने वाले पानी को लेकर संकट की बात कही हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शुद्ध पेयजल में केमिकल की मात्रा बढ़ी हैं, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया हैं कि प्रदेश में बहने वाली नदियों के पानी में बैक्टरिया की वजह से पानी का ऑक्सीजन लेवल दिन ब दिन कम होता जा रहा है।
केंद्रीय मंत्रालय की रिपोर्ट में इस विषय को लेकर बताया गया है, कि पेयजल में केमिकल की अधिकता वाले राज्य में छत्तीसगढ़ देश में चौथे स्थान पर है। वहीं एक केमिकल टेस्ट की रिपोर्ट में यह बताया गया है,कि प्रदेश के पांच बड़ी नदियां हसदेव, खान, महानदी, शिवनाथ और केलो का पानी जहर बनता जा रहा है। इसके पानी में ऐसिड की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। जिससे नदियों के पानी में ऑक्सीजन लेवल भी कम होता जा रहा है। जो कि एक चिंता का विषय है।
केंद्रीय मंत्रालय ने पेयजल की जांच के लिए सभी राज्यों से पानी के नमूनों को लिया था। बता दें कि जल शक्ति मिशन के तहत घरेलू नल कनेक्शन, सार्वजनिक नल और अन्य जल स्त्रोतों से पेयजल के सैंपल लेकर उनकी नियमित जांच कराई जाती है। जांच के बाद यह रिपोर्ट हर राज्य को भेजी जाती है कि पेयजल में कितने नमूनों में मापदंड के अधिक बैक्टीरिया और केमिकल मिला है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा बिलासपुर में केमिकल पाया गया है। बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा तो औद्योगिक क्षेत्र है लेकिन बीजापुर जैसे वनांचलों के पानी में भी केमिकल की अधिकता मिल रही है। पेयजल में बढ़ रहे केमिकल और नदियों के पानी मे बढ़ रहे बैक्टीरिया का विषय बेहद चिंतनीय है।

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