पढ़ने लायक

प्रमोशन में आरक्षण का नियम बनाते वक्त सरकार ने नहीं किया कोर्ट के नियमों का अध्यन

राज्य सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण नीति के तहत SC वर्ग के लिए 13 फ़ीसदी और ST वर्ग के लिए 32 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान किया था। जिस पर विष्णु तिवारी और गोपाल सोनी के द्वारा याचिका दायर किया गया और राज्य सरकार द्वारा घोषित किये गए आरक्षण को हाईकोर्ट में चुनौती दिया गया।

चीफ़ जस्टिस रामचंद्रन और जस्टिस पी पी साहू की बेंच नंबर 1 मामले की सुनवाई कर रही है। इस याचिका पर सरकार को रविवार तक का समय दिया गया था मगर राज्य सरकार के आग्रह पर हाईकोर्ट ने सोमवार तक का समय प्रदान किया।

केस नंबर 9778/2019 में याचिका कर्ता कीओर से प्रयुक्त किये गए अधिवक्ता प्रफुल्ल भारत और विवेक शर्मा ने तर्क दिया है कि
“छत्तीसगढ़ सरकार का यह आदेश हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के खिलाफ है, माननीय हाईकोर्ट ने शरद श्रीवास्तव विरुद्ध छत्तीसगढ़ विद्युत् मंडल के प्रकरण में चार फ़रवरी 2019 को प्रमोशन के आदेश को असंवैधानिक माना था, वहीं सुप्रीम कोर्ट में इसी विषय का प्रकरण जनरैल सिंह के द्वारा चलाया गया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने प्रमोशन में आरक्षण को ग़लत मानते हुए टिप्पणी की -“क्रीमीलेयर को आरक्षण का फ़ायदा नहीं दिया जा सकता”
इस मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई की जिसमें राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच के सामने भूल स्वीकारी और कहा
“अधिकारियों ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का अध्ययन करें बग़ैर नियम बना दिया है.. एक हफ़्ते का समय दें”
हाईकोर्ट ने मामले में राज्य की ओर से दिए कथन के बाद एक हफ़्ते का समय दे दिया है, याचिका की सुनवाई हाईकोर्ट अगले सोमवार 9 दिसंबर को होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.