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रकबा कम करने को लेकर सदन में कटा बवाल, हंगामे के बीच 5 मिनट रोकी गई कार्यवाही

सदन में शून्यकाल के दौरान बीजेपी ने धान रकबा के मामला को उठाया और स्थगन पर चर्चा की मांग की। खाद्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने धान के रकबे में कटौती करने के कोई निर्देश नहीं दिया है।
सरकार के जवाब के बाद विपक्ष ने आपत्ति जताते हुए हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह मामला किसानों से जुड़ा हुआ है। इस तरह के गंभीर मामलों में चर्चा करना आवश्यक है।
विधानसभा अध्यक्ष ने 5 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करने का आदेश दिया।
सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद फिर से विपक्ष के साथ अन्य विधायकों ने भी धान रकबा का मामला उठाया और एक के बाद एक प्रश्न करते गए।

बीजेपी विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि एक उच्च स्तरीय अधिकारी ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि धान का रकबा कम किया जाए।

अजय चन्द्राकर ने कहा कि -कृषि, राजस्व विभाग के लोग किसानों को रकबा कम करने डरा रहे हैं । मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को रकबा कम करने निर्देश दिया है। हर जिले में रकबा घटाने का टारगेट दिया गया है। जिला कलेक्टरों ने तहसीलदार को और तहसीलदार ने पटवारियों को रकबा कम करने लक्ष्य दिया है. सरकार इसके जरिये 3 से 4 लाख हेक्टेयर की धान खरीदी से बचना चाह रही है. किसान अस्त व्यस्त हो गए है। किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा- किसान इससे चिंतित है। इस निर्णय से किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाएगा। पूरे प्रदेश में करीब 5 लाख हेक्टेयर रकबा कम करने के निर्देश है। ये किसानों के साथ अत्याचार है।
जेसीसी विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि जब रजिस्ट्रेशन सरकार ने किया है तो अब किसानों को रकबा कम करने के नाम पर परेशान करने की जरूरत नहीं है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा- यह बेहद गंभीर मामला है। लिखित रूप से यह निर्देश जा रहा है। आदेश में लिखा गया है कि हर जिले में 15 हजार हेक्टेयर रकबा कम किया जाए। आदेश में कहा गया है कि यदि रकबा कम नहीं हुआ तो संबंधित जिले के अधिकारियों-कमर्चारी जिम्मेदार होंगे।

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा है कि धान खरीदने वाली सरकार किसानों को धमका रही है। रकबा कम करने की धमकी दी जा रही है। एफआईआर तक की धमकी किसानों को दी गई है। किसान पर्ची लेकर सोसायटी में जा रहे है लेकिन खरीदी नहीं हो रही। दो-दो लाख मीट्रिक टन धान सभी जिलों से कम खरीदने की ये साजिश है।

खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने सबका जवाब देते हुए कहा कि- रकबे में अनावश्यक कटौती करने कोई निर्देश जिला कलेक्टरों को नहीं दिया गया है. रकबा संशोधन के निर्देश दिए गए हैं।
27 लाख 23 हजार हेक्टेयर रकबा पंजीकृत है। 1 लाख 62 हजार हेक्टेयर रकबे की बढ़ोतरी हुई है। जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और डीएफओ को सीमावर्ती राज्यों से अवैध धान रोकने के निर्देश शासन ने दिए है. बड़ी तादात में धान की जप्ती बनाई गई है। किसानों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कृषि उपज की स्टॉक सीमा 4 क्विटल से बढ़ाकर दस क्विंटल किये जाने की घोषणा सरकार ने किया है।
किसान द्वारा बोए गए फसल की पुष्टि भुइयां सॉफ्टवेयर से की गई है। एक करोड़ 80 लाख कृषि भूमि में फसलों की जानकारी ऑनलाइन है।

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