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सुपेबेड़ा में नहीं हुई एक भी मौत, धनेन्द्र साहू के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री का जवाब

फ्लोराइड युक्त पानी से सुपेबेड़ा गांव पुरी तरह झुलस रहा है, ग्रामीणों का दावा है कि किडनी के बीमारी से अब तक 73 से भी अधिक मौत हो गयी है, ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने किडनी की बीमारी से एक भी मौत को नहीं स्वीकारा है ।

शीतकालीन सत्र के दुसरे दिन सदन में कांग्रेस के विधायक धनेन्द्र साहू ने सुपेबेड़ा से जुड़े सवाल किए, उन्होंने पूछा कि स्वास्थ्य मंत्री बताए कि सुपेबेड़ा में अब तक किडनी की बीमारी से कितनी मौत हुई है।किस-किस व्यक्ति की मौत किस तारीख को हुई है।शासन द्वारा मृतको के परिजनों को कितनी राशी मुआवजे के रूप में दी गई है।किडनी की बीमारी के लिए सुपेबेड़ा में क्या इलाज की सुविधा दी जा रही है और क्या उपाय किये जा रहे हैं।

इस पर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने जवाब देते हुए एक भी मौत को नहीं स्वीकार, और जब मौत ही नहीं हुई तो मुआवजा किस बात की।पर हाँ किडनी की बीमारी के रोकथाम और उपाय की उन्होंने ने जानकारी दी ।

उन्होंने कहा कि किडनी और अन्य बिमारियों के रोकथाम के लिए 6 वाटर प्लांट और तेल नदी से शुद्ध पेय जल पूर्ति की जा रही है। ग्राम सुपेधे की स्वास्थ्य समस्या को समझने के लिए गत वर्षों में आईसीएमआर जबलपुर को पत्र प्रेषित करते हुये प्रारंभिक अध्ययन कराया गया, भारत सरकार की तकनीकी टीम एनसीडीसी के माध्यम से भी प्रारंभिक अध्ययन किया गया एवं उनके माध्यम से दिय अनुशंसाओं का पालन किया गया शासन (सचिव, छ.ग। शासन को अध्यक्षता में) द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा की गई एवं समय-समय पर स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा अन्य विभागों के अधिकारियों को उनसे संबंधित अधिकारीयों को सुधारने के दिशा-निर्देश भी दिये गये। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर, एम्स रायपुर डोकेएस सुपर स्पेशिलिटी रायपुर एवं प्रमाणित प्राप्त निजी चिकित्सालयों द्वारा ग्राम मुभेबेड़ा में विशेष कैंप आयोजित कर तथा पीड़ित मरीजों को चिकित्सालयों में भर्ती कर निःशुल्क चिकित्सा सुविधा दी गई संजीवनी कोष के माध्यम से भी इन निःशुल्क चिकित्सा सुविधा दी गई।

गरियाबंद जिले के विकासखंड देवभोग में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में विशेष प से आधुनिक उपकरणों से मुसजित कर प्रयोगशाला को कियान्वित किया गया ता मेडिसिन के विशेषज्ञ की पद्स्थापना भी की गई, डायलिसिस करने हेत देवभोग में डायॉलमिस यनिट की स्थापना को गई, ताकि पीड़ितों की आवश्यकतानुसार उनकी सहमति उपरांत देवभोग में डायलिसिस की सुविधा दी जा सके।

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