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धान पर बोले भूपेश बघेल – केंद्रीय खाद्य मंत्री ने बताया सारे फैसले PMO से , विपक्ष के एक एक बिंदु पर करारा जवाब

छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सरकार के रवैये को लेकर सदन में आक्रामक नजर आये तो वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ी ही शालीनता से जवाब दिया।

डॉ. सिंह ने सदन में सवाल किया कि जब विपक्ष में थे, तब 1 नवंबर से धान खरीदी को लेकर पत्र लिखते थे। आज छत्तीसगढ़ की किसान सदन की एक-एक बात जानना चाहती हैं । किसान जानना चाहते हैं कि धान खरीदी में वादा खीलाफी क्यों? 15 नवंबर को धान खरीदी का वादा कर 1 दिसंबर से धान खरीदने की बात कर रहे हैं। और किसानों पर जिस प्रकार की कार्यवाही हो रही है उससे किसान बड़े दुःख और व्यथित हैं।  जिस घोषणा पत्र के बदौलत प्रदेश में कांग्रेस को बहुमत मिला और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने किसानों को दो साल का बोनस और 2500 धान खरीदी के साथ कर्जा माफ़ी का वादा किया था। इस पर राज्य सरकार ने अल्पकालीन माफ़ी की बात कहकर किसानों का विश्वास तोड़ा है। यह सरकार सुनिश्चित करें कि प्रदेश  के बाहर से धान नहीं आएगा। बॉर्डर सील करने की व्यवस्था राज्य सरकार करे। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन ने आगे कहा कि जब प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी तब किसानों को एक माह में पम्प का कनेक्शन मिलता था। राज्य में सरकार बदलते ही गणना उत्पादन में 50% की कमी कर दिया गया क्या कारण है कि आज प्रदेश में गणना खरीदने के लिए व्यवस्था नहीं किया गया है। डॉ. रमन ने आगे कहा कि राज्य के किसान स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं।  प्रदेश के कई जिलों में फसल बर्बाद हुई है मगर किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिला है। छत्तीसगढ़ में बायोफ्यूल चावल से बनाने की बाते करने वाले मुख्यमंत्री को उसकी लागत और इससे किसानों की स्थिति क्या होगी इसका अंदाजा नहीं है।

सदन में मुख्यमंत्री भूपेश ने डॉ. रमन की बात बड़े ही ध्यान से सुना और फिर जवाब दिया । उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का विरोध केंद्र सरकार का नही बल्कि केंद्र के नीतियों का विरोध कर रही है। धान खरीदी के नियमों में केंद्र सरकार ने 2 साल तक नियम शिथिल रखी थी मगर अब केंद्र सरकार नियम शिथिल करने में इतना देरी क्यों कर रही है। छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने से किसानों को सजा मिल गयी या केंद्र सरकार के शिथिल रवैय्या से किसानों को तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हमने केंद्रीय मंत्रियों से मिल कर इस मुद्दे पर चर्चा किया जिनसे हमें शत प्रतिशत आश्वासन भी  प्राप्त हुआ। हमनें प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी मिलने के समय मांगे और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर और रामविलास पासवान से मिलकर इस विषय पर चर्चा भी किया था। 

हम सांसदों का घेराव नहीं करना चाहते थे। लेकिन वे भी छत्तीसगढ़ के जनप्रतिनिधि है उनकी भी जिम्मेदारी है। इसलिए हमने उन्हें याद दिलाने के लिए पहले निवेदन किया फिर बाद में घेराव का कार्यक्रम बनाया। धान के मसले पर छत्तीसगढ़ सरकार राजनीति नहीं कर रही है। राजनीति तो बीजेपी की पूर्ववर्ती सरकार कर रही थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  ने कहा कि हमारी सरकार वादा खिलाफी नहीं वादा पूरा करने वाली सरकार है। वादा करके हम बैठ सकते थे मगर हमारा प्रयास जारी है।

 एथेनॉल के प्रोजेक्ट पर डॉ. रमन के सवाल का जवाब जब दिए तब मुख्यमंत्री ने डॉ. रमन के लिए ही दुविधा खड़ा हो गया। मुख्यमंत्री बघेल ने डॉ. रमन से पूछा कि  पहले ये तो बताइए कि आपके जटरोफा का क्या हुआ? जेटरोफा के नाम पर आपने करोड़ रूपये फूंक दिया।

हमारी सरकार एथेनॉल प्लांट के लिए प्रयत्न कर रही है। हमने धर्मेंद्र प्रधान से इस विषय पर भेंट भी किया मगर इस पर भी केंद्र सरकार अड़ंगा लगा रही है। जिस प्लांट को करोड़ो रुपये खर्च कर के लगाया जायेगा उसकी अनुमति मात्र एक साल। केंद्र सरकार की नीतियां राज्य के विकास में बाधा बानी हुई है। मुख्यमंत्री ने किसानों से 1 दिसंबर से धान खरीदी करने का एलान किया और 2500 समर्थन मूल्य पर ही खरीने की बात कह कर अपना वक्तव्य समाप्त किया।

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा इतना चर्चा करने का कोई फायदा ही नहीं हुआ। आप धान खरीदी का समय पहले नहीं कर रहे। तो क्या फायदा हम वाकआउट करते हैं इतना कह कर नेता प्रतिपक्ष ने अपनी बात समाप्त कर दिया और सभी विपक्षीय विधायकों ने सदन से वाकआउट कर दिया।

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