गरियाबंद जिले देवभोग में धान खरीदी में हो रही देरी का आक्रोश कुछ ऐसा फूटा कि किसानों ने अपने फसल से उगाये धान को जमीन पर कचरे की तरह फेंक दिया। राज्य सरकार की ओर से धान खरीदी की तारीख बढ़ाने एवं खरीदी पर लगी सख़्ती किसानों को आर्थिक तंगी का सामना करा रही हैं। ऐसे में किसानों ने अपना धान सड़क पर फेंका। किसानों का कहना है कि धान की चिल्हर बिक्री नहीं कर पा रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक रूप से तकलीफ का मर्म झेलना पड़ रहा हैं।

किसानों का कहना है, दुकानदार धान की चिल्हर बिक्री भी नहीं कर रहे हैं, इससे आर्थिक तकलीफ हो रही है। वहीं दुकानदारों ने प्रशासन की सख्ती के बाद अपने दुकानों के सामने बोर्ड लगा दिया है कि वे धान खरीदी नहीं कर रहे हैं।

केंद्र और राज्य के मध्य हो रहे धान खरीदी के विवाद का खामियाजा प्रदेश के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। गरियाबंद ही नहीं जगदलपुर, कोंडागांव, माकड़ी जैसे जगहों पर भी किसान मायूस है। जहां साप्ताहिक बाजार तो लगा लेकिन व्यापारियों ने सरकारी फरमान के चलते किसानों से धान की खरीदी नहीं  की। शासन-प्रशासन के इस रवैये का असर किसानों पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है। सियासी विवाद किसानों पर आर्थिक बाधा बनने लगी है।

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