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गरवा के बाद अब नरवा की बारी, रिज टू वैली परिकल्पना से नालों को संवारने की कवायद

राज्य सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट कहे जाने वाले “नरवा, गरवा, घुरवा अउ बारी” में अबतक सरकार गौठान पर कार्य कर रही थी। लेकिन अब गौठान के साथ-साथ नरवा के तहत नालों के संवारने का काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

राज्य सरकार रिज टू वैली परिकल्पना के साथ नालों का संवर्धन करने की नीति बना रही है। जिसके लिए सरकार ने प्रदेश के हर ब्लॉक में दस नाले और नहर का चयन किया है और उनके लाइनिंग से लेकर अन्य सुधार तक का  प्रस्ताव तैयार कर लिया है।

पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने बताया “प्रदेश में नालों को बचाने के लिए हर दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा रहा है। हर ब्लॉक में वैज्ञानिक विधि से दस नालों को संरक्षित और जल संचयन के लिए तैयार किया है,सरकार के इस कदम से प्रदेश के करीब 22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में भूजल स्तर बढ़ेगा।”

क्या है रिज टू वैली परिकल्पना ?

इस परिकल्पना में पानी की एक एक बूंद संजोयी जाती है। पानी के बहाव को देखकर जल संरक्षण करने की तैयारी की जाती है। इसके लिए नरवा वाटरशेड के डीपीआर में वाटरशेड,जीआइएस और सिविल इंजीनियरिंग के सिद्धांतों व तकनीकी को शामिल किया गया है।

बता दें कि राज्य सरकार ने नरवा के तहत उपचार के लिए अब तक प्रदेश के 1448 नालों का चयन किया है। इसमे पानी के संचयन के लिए वैज्ञानिक पद्धति से कार्य किया जाएगा। पंचायत विभाग मनरेगा के तहत नहरों की लाइनिंग का काम करने वाला है।

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