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आज से छत्तीसगढ़ में होंगे 28 जिले..कैसा होगा सियासी असर

छत्तीसगढ़ में आज से 28 जिले होंगे। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को नए जिले के रूप में मान्यता दे दी गई है। आज गौरेला-पेंड्रा और मरवाही ब्लॉक को मिलकर एक नए जिले का निर्माण कर दिया गया है। 20 नवंबर को राज्य सरकार ने इसके लिए अपने राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दिया गया है। इस नये जिले के बनने के बाद अब वहां के स्थानीय लोगों को छोटे-मोटे काम के लिए बिलासपुर का चक्कर नहीं काटने पड़ेगा। लम्बे समय से क्षेत्र के लोग इसकी मांग कर रहे थे। बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसकी स्वयं घोषणा की थी।

अब अजीत जोगी का गृह जिला हुआ छोटा

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का गृह जिला बिलासपुर काफी बड़ा हुआ करता​ था । लेकिन अब उनका गृह जिला काफी छोटा हो गया है। यानी पहले बिलासपुर जिले में मूंगेली, बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर चांपा और पेंड्रा गौरेला मरवाही भी आता था। जाहिर है गृह जिला होने की वजह से उनका दायरा भी बड़ा था। लेकिन अब जोगी का गृह जिला कहते ही नवीन जिला गौरला पेंड्रा मरवाही ही माना जाएगा।

क्या कांग्रेस की बढ़ेगी पैठ

नए जिले में क्या कांग्रेस की पैठ बढ़ेगी क्योंकि विधानसभा चुनाव के परिणाम बताते हैं कि, पेंड्रा मरवाही में अजीत जोगी का सिक्का चलता है। भूपेश बघेल ने चुनाव से पहले वादा किया था कि, परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहे तो नया​ जिला बनाएंगे। परिणाम कांग्रेस के पक्ष में तो नहीं रहा जनता कांग्रेस के पक्ष में चला गया । इसके बाद भी भूपेश बघेल ने नया जिला बनाकर यह बताया कि, वे मांग के पक्ष में हैं और नए जिले की घोषणा कर दी। अब तक जहां राजनीतिक दलों के मंडल और ब्लाक अध्यक्ष बैठते थे अब वहां जिलाध्यक्ष बैठेंगे जाहिर तौर पर जिले में सियासी हलचल बढ़ेगी और इसका फायदा कांग्रेस जिला बनाने की क्रेडिट के साथ कांग्रेस उठाना चाहेगी।

ये जिला बनने के इंतजार में

गौरेला पेण्ड्रा जिला बनने के बाद अब छत्तीसगढ़ में जिले की मांग कर रहे बाकि विकासखण्ड भी मांग तेज कर रहे हैं। इसमें रामनुजगंज, सक्ति, सारंगगढ़, पखांजूर, जैसे क्षेत्र हैं जो जिला बनाने की मांग कर रहे हैं। क्षेत्रफल के लिहाज से ये जिन जिलों से अलग होना चाहते हैं, उनका दायरा काफी बड़ा है।

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