रायपुर। लोकसभा में छत्तीसगढ़ के धान का मुद्दा चल रहा था। कांग्रेस के सांसद केंद्र की बीजेपी सरकार को प्रदेश का चावल नहीं खरीदे जाने को लेकर घेर रहे थे। कांग्रेस के सांसदों ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार बीजेपी के शासनकाल में प्रदेश का चावल सेंट्रल पूल में ले रही थी। अब केंद्र सरकार सेंट्रल पुल में चावल नहीं ले रही है। कांग्रेस सांसदों के इस विरोध का जवाब देते हुए रायपुर सांसद सुनील सोनी ने कहा कि, जहां चर्चा होनी चाहिए वहां अपशब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। जहां चर्चा होनी है वहां चर्चा करनी चाहिए। गंगाजल हाथ में लेकर कांग्रेस ने 25 सौ रूपए धान का समर्थन मूल्य खरीदने का वादा किया था। यह विवाद कांग्रेस का शुरू किया हुआ है। कांग्रेस का घोषणापत्र है कांग्रेस को लागू करना चाहिए।

सुनील सोनी बाकि बातें सही कह रहे हैं। गंगाजल वाले प्रसंग में सुनील सोनी झूठ बोल रहे हैं। दरअसल गंगाजल की कसम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आरपीएन सिंह, जयवीर शेरगील, राधिका खेरा, शैलेष नीतिन त्रिवेदी ने खाई थी। गंगाजल की कसम खाने की जरूरत क्यों पड़ी थी, इस पर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि, बीजेपी अपनी सोशल मीडिया टीम के जरीए लगातार फर्जी लेटरपेड बनाकर कर्जमाफी को लेकर झूठ फैला रही थी।

स्थानीय टीवी चैनलों में फोटोशॉप करके और शैलेष नीतिन त्रिवेदी के लेटरपैड में गीरीश देवांगन का ईमेल आईडी लिखकर कर्जमाफी के दावे को असामाजिक तत्व झुठलाने का प्रयास कर रहे थे। कांग्रेस को अपने कर्जमाफी के वादे पर किसानों का भरोसा बनाए रखने के लिए यह वादा किया गया था। यह वादा केवल कर्जमाफी के लिए था। लेकिन अब बीजेपी के नेता इसमें शराबबंदी, धान खरीदी जैसे कई विषय अपनी सुविधा से जोड़ लेते हैं।

हालांकि राजनीति में झूठ बोलना नया नहीं है। समय समय पर माहौल बनाने के लिए नेता झूठ बोलते रहते हैं। मगर तोपचंद के फर्जीपकड़ नजरों से कोई नेता छूट नहीं सकता। झूठ बोलने वालों को करेक्ट करना हमारा काम है।

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