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किराये के भवन में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र, विभाग के पास फंड तो है पर जमीन नहीं!

सरकारी योजनाएं, जिन्हें एक तरफ कागजों में अपने पूर्ण कर चुके लक्ष्यों के साथ दिखाया जाता है, लेकिन वहीं  दूसरी तरफ इनकी जमीनी हकीकत दावों से विपरीत नजर आती है।

ऐसी ही एक जमीनी खबर है,रायपुर जिले में संचालित आंगनबाडी केन्द्रों की,जो आज भी भवनों के अभाव में चलाए जा रहे है।

महिला बाल विकास मंत्रालय रायपुर जिले में 8 परियोजनाओं का संचालन कर रहा है। जिसके अंतर्गत 1825 आंगनबड़ियों का संचालन होता है। अभनपुर में 307, तिल्दा में 252, रायपुर शहर में 316, आरंग में 241, धरसीवा में 313, धरसीवा(2) में 226, मंदिरहसौद में 170, आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे है।

जिसमें से 800 से ज्यादा आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास अपने स्वयं के भवन नहीं है। और जिनके पास अपने स्वयं के भवन है, उनमें से कई केन्द्रों में बिजली, पंखे, शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है।

रायपुर शहर में संचालित 316 केन्द्रों में केवल 54 केन्द्रों के पास ही अपने स्वयं के भवन है और 262 केंद्र भवनविहीन है।

महिला बाल विकास के डीपीओ अशोक पाण्डेय का कहना है “ हमारे पास बजट की कमी नहीं है , लेकिन शहर में कहीं सरकारी जमीन ही नहीं मिलती इस कारण हम आंगनबाड़ी केन्द्रों को किराए के भवन में संचालित करते है। “

जहां बच्चो के लिए सुपोषण योजना से लेकर गर्भवती महिलाओ के लिए पोषणाहार जैसी सुविधाओ का संचालन आंगनबाड़ी के माध्यम से ही किया जाना है वहां  आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास अपने स्वयं के भवन नहीं होना,सुविधाएं नहीं होना एक बहुत बड़ी समस्या है, जो कहीं ना कहीं सरकारी दावों को भी गलत ठहराते है।

जहां दावों के विपरीत आंगनबाड़ी केन्द्रों में सुविधाओं का अभाव है वहां बच्चों को सुपोषित करने एवं महिलाओं के पोषणाहार देने की बातें भी अपने आप में प्रश्न खड़ा करती है।

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