देवेंद्रपटेल @ आयोध्या के विवादित जमीन मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद भारत के हिन्दू और मुस्लिम जनता दोनों खुश है। मगर राजनीति और धार्मिक गलियारों में असंतुष्टि का माहौल बना हुआ है। जहां मुस्लिम पर्सनल बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्याचिका दायर करना चाहती है। वही पूरी पीठाधीश्वर के शंकराचार्य निश्चलानंद का कहना है कि आयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य के लिए खतरनाक साबित होंगे।

शंकराचार्य का कहना है कि कोर्ट द्वारा मुस्लिम पक्ष को आयोध्या में 5 एकड़ जमीन मस्जिद निर्माण के लिए देना दुर्भाग्यजनक फैसला है। उन्होंने मोदी से यह मांग भी किया कि संसद में विशेष सत्र बुलाकर वक्फ बोर्ड को दी गई जमीन वापस ले।
रायपुर में धर्मसंघ पीठ परिषद की बैठक में शंकराचार्य ने कहा कि कोर्ट द्वारा सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन देने के फैसले से एक बार फिर हिन्दू मुस्लिम आमने सामने हो जायेंगे। इस स्थिति को बिगड़ने से रोकना चाहिए और वक्फ बोर्ड को दिया गया जमीन का आदेश रद्द कर देना चाहिए।

उधर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उलेमा ए हिन्द के सदस्य जफरयाब जिलानी व अरसद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर संतुष्टि जताया है। जफरयाब जिलानी का कहना है कि वह अल्लाह का जमीन है। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि महफूजुर्रहमान, मुहम्मद उमर और मिस्बाहुद्दीन कुछ दिनों में याचिका दाखिल करेंगे।
लेकिन मस्जिद के मुख्य पक्षकार इकबाल अंसारी ने याचिका दाखिला के फैसले का विरोध किया।अंसारी ने कहा कि मंदिर मस्जिद के फैसले का अंत हो।

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