राज्य में धान खरीदी की देरी ने प्रदेश के किसानों को बेबसी में डाल दिया है। आलम यह है कि धान खरीदी को अभी 14 दिन शेष बचे है और राजनांदगांव में ढाई करोड़ के धान कोचियों और बिचौलियों की झोली में गिर गया है। आंकड़े सिर्फ राजनांदगांव के है और न जाने किन-किन जिलों में अब धान खरीदी में देरी कोचियों और बिचौलियों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है।

तोपचंद डॉट कॉम ने जब इस मसले पर कांग्रेस से बात की है तो पार्टी की तरफ से अपील की गई है कि धान की बिक्री सरकार की निर्धारित समय पर करे। लेकिन, किसान तो किसानों है..उसकी मज़बूरी वही जाने।

मिले हुई आंकडे कहते हैं कि ढ़ाई करोड़ के धान अब तक किसानों ने कोचियों और बिचौलियों को बेचे है। बसंतपुर मंडी से प्राप्त आंकड़ों के हिसाब से 15 नवंबर को 11000 बोरा धान आया था जिसमे 7000 नए धान का बोरा है। जहाँ नए धान 1010 की न्यूनतम से 1470 अधिकतम 1500 और औसतन 1490 रूपया प्रति क्विंटल के मूल्य से बिका है।

शुरू से राजनीति की भेंट चढ़े किसानों की इस मजबूरी पर भाजपा ने कहा है इसके लिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है। प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने  कहा कि सीधा मामला यह है कि कांग्रेस बिचौलियों के माध्यम से किसानों से धान 1500 में खरीदेगी और धान को 2500 बेचकर 1000 रुपये प्रति क्विंटल फायदा कामना चाहती है। वास्तविक रूप से सरकार द्वारा धान खरीदी का दिनांक 1 दिसंबर बढ़ाये जाने से कोचियों को फायदा होगा और कहीं न कहीं इन कोचियों का कांग्रेस से सम्बन्ध है।

कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने इस पर कहा कि मैं भजपा को कोई जवाब नहीं देना चाहता बस राजनांदगांव के किसानों से मेरा आग्रह है कि बिचौलियों को अपना धान न बेचे। एक दिसंबर से 2500 रुपये समर्थन मूल्य पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सरकार द्वारा धान ख़रीदा जायेगा। सरकारी मंडी में ही 2500 समर्थन मूल्य अपना धान बेचे।

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