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भाजपा सरकार की लापरवाही से मैनपाट में नहीं बना बर्ड सेंचुरी, 2013 में किया गया था घोषणा

मैनपाट छत्तीसगढ़ का प्रमुख पर्यटन केंद्रों में एक है। इस क्षेत्र में पर्यटकों के साथ विदेशी और देशी पक्षियों का भी आना होता है। पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए मैनपाट क्षेत्र के टाइगर पॉइंट इलाके में बर्ड सेंचुरी बनाने का निर्णय लिया गया था। लगभग 15 एकड़ परिक्षेत्र में सेंचुरी का निर्माण होना था।  वाइल्ड लाइफ देहरादून से आये वैज्ञानिकों ने इस इलाके का परिक्षण व निरिक्षण कर बर्ड सेंचुरी बनाने के लिए अपनी मंजूरी दे दिया था। 2013 में तत्कालीन भाजपा सरकार के द्वारा इसके लिए घोषणा भी की गई थी, मगर सरकार द्वारा फंड जारी नहीं किये जाने से कार्य प्रारम्भ हो पाया। इस इलाके में बर्ड सेंचुरी नहीं होने की वजह से गौरय्या और कौवा की प्रजाति समाप्त होते जा रही है। अब शहरों में कौवे नहीं दिखते हैं।

इसी तरह बस्तर में भी पक्षी अभ्यारण बनाया जाना था। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इण्डिया (जेड.एस.आई.) के सर्वे अनुसार हर साल लगभग 325 प्रजाति के पक्षियों का भ्रमण बस्तर में होता हैं।  इस क्षेत्र में उत्तर भारत के अलावा कई विदेशी पक्षीयां देखने को मिलता है। बर्ड साइंटिस्ट डॉ. सुशील दत्ता का कहना है कि उत्तर भारत और साइबेरियन पक्षीयों के लिए बस्तर का वातावरण इन पक्षियों के लिए अनुकूल है। कुछ विदेशी पक्षी मालाबार ट्रोगोन ग्रीष्मकाल में आने वाली पक्षी है मगर बस्तर में इसे वर्ष भर देखा जाता है। स्पॉट बिल्ड पेलिकांन भी यहाँ साल भर रहता है।

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