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देश को मतदाता परिचय पत्र देने वाले शेषन ने दुनिया को कहा अलविदा

मतदाता परिचय पत्र जिसकी महत्ता से हर कोई वाकिफ है। क्या आपको पता है इसके पीछे एक शख़्स ने लंबी लड़ाई लड़ी, जिनका नाम था टी एन शेषन, भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त, जिनका रविवार रात 9:30 बजे निधन हो गया। इनके साथ ही कर्तव्यनिष्ठा के एक युग का अंत हुआ।

1955 बैच के टॉपर आई एस एस ऑफिसर रहे शेषन ने 1990 से 1996 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में अपनी सेवा दी। जिस दौरान एक मजाक प्रचलित हो चला था। भारत का नेता दो ही लोगों से डरता है, एक खुदा दूसरा टीएन शेषन! शेषन का यह खौफ, यह रुतबा केवल दिखावटी नहीं था, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (तत्कालीन केंद्रीय मंत्री), पूर्व राज्यपाल गुलशेर अहमद, राज्यपाल बलिराम भगत जैसो को भी अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

जिनकी बदौलत हमें मिला “मतदाता परिचय पत्र” से पहचान

शेषन की कड़ी मेहनत और जिद्दी रवैये ने ही भारत के नागरिकों को मतदाता परिचय पत्र मुहैया कराया था। उस दौर में जब नेताओ द्वारा इसे एक जटिल और खर्चीला व्यवस्था बतलाया, तब शेषन ने अपने अंदाज में जवाब दिया था कि अगर मतदाता परिचय पत्र तैयार नहीं हुवे तो भारत में 1 जनवरी 1995 के बाद कोई चुनाव नहीं कराए जाएंगे। उस दौरान उन्होंने कई दफे चुनाव स्थगित करवाए जिन राज्यों में मतदाता परिचय पत्र मुहैया नहीं कराए गए थे।

शेषन का एक कथन जो उनकी कर्तव्यनिष्ठा बयां करती है- “मैं वही कर रहा हूँ जो कानून मुझसे करवाना चाहता है. उससे न कम न ज़्यादा. अगर आपको कानून नहीं पसंद तो उसे बदल दीजिए. लेकिन जब तक कानून है मैं उसको टूटने नहीं दूँगा.”

86 वर्ष की उम्र में रविवार की रात अपने चेन्नई स्थित निवास में उन्होंने अंतिम सांसे ली और भारत के लिए अपनी जीवन शैली से जुड़े कई संदेश पीछे छोड़ गए।

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