फर्जी पकड़

धान खरीदी का आदेश आपके वाट्सएप पर भी आया होगा, उसका सच इधर पढ़ लीजिए

छत्तीसगढ़ में सोशल मीडिया पर एक आदेश की कॉपी वायरल है। यह धान खरीदी के आदेश की तस्वीर है। अब आप सोच रहे हैं इसमें नया क्या है। मगर मसला तब कठिन हो जाता है जब आदेश के साथ लोग अपने अपने ढंग से आदेश समझाने लगते हैं।

सरकार की ओर से जारी आदेश में कलेक्टरों को यह सूचित किया गया है कि, इस साल केंद्र सरकार ने मोटे धान का समर्थन मूल्य 1815 रूपए और पतले धान का 1835 रूपए तय किया है। केंद्र ने असल में इतना ही समर्थन मूल्य तय किया है। और इसी किमत पर धान की खरीदी भी होगी, आदेश पूरी तरह सही है। फिर इस आदेश को लेकर सोशल मीडिया पर चरस की फसल क्यों उगाई जा रही है।

जैसे भारतीय जनता पार्टी को देख लिजिए ट्वीटर पर इस आदेश की कॉपी को पोस्ट करते हुए सीएम भूपेश बघेल को लिखा है कि,

आपके वादे हैं, आँकड़े भी आपके ही हैं

सच क्या है दुनिया को बतलाइए आप ही

मुख्यमंत्री @bhupeshbaghel जी आपके इस आदेश में धान का जो मूल्य दिख रहा है वह किसानों के साथ छल है। आपके वादे पर विश्वास कर कठिन परिश्रम से इस फसल को सींचने वाले कृषकों के साथ यह अन्याय जनता स्वीकार नहीं करेगी

यानी बीजेपी के लिखने का मजनून यह कहता है कि, कांग्रेस सरकार ने 2500 में धान खरीदने का वादा किया था, फिर सरकारी आदेश में 1815 रूपए कैसे हो गया। इसे लेकर कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि, पत्र के आखिरी हिस्से की लाईन को अफवाह फैलाने वाले नहीं बता रहे जिसमें लिखा है-

प्रदेश के पंजीकृत किसानों से धान खरीदी की दर के संबंध में पृथक से आदेश जारी किया जाएगा। यानी जो आदेश फिलहाल ​दिया गया है वह केंद्र के समर्थन मूल्य के बारे में है। राज्य अपने दर के संबंध में अलग से आदेश जारी करेगा।

लेकिन सियासत में इफ एंड बट नहीं होता, इसलिए विपक्ष निचे की लाईन की जगह धान के दर पर सरकार से सवाल पूछ रहा है।

इस संबंध में पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव तस्वीर को थोड़ा साफ करने की कोशीश की

उनका कहना है कि, सवाल उठाने वाले विपक्ष के लोग भी कभी सरकार का हिस्सा रहे हैं। जल्दबाजी में अफवाह फैलाने की जगह प्रक्रिया को समझ लें। कभी भी धान खरीदी के आदेश में बोनस का जिक्र नहीं होता..आदेश में केंद्र की ओर से जारी समर्थन मूल्य को ही अंकित किया जाता है।

हमेशा से बोनस के संबंध में अलग से निर्णय लिया जाता है। इसके अलावा किसानों को समर्थन मूल्य की राशी एक बार में ही उनके खाते में दी जाती है। बाकि बोनस की राशी किश्तों में किसानों के खाते में जमा कराई जाती है। इसलिए यह अफवाह है।

कुल मिलाकार धान के समर्थन मूल्य को लेकर जारी आदेश सही है। बस उसे देखने का नजरिया विपक्ष और पक्ष का बदल गया है। यानी जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिंह तैसी। 

उसी तरह आदेश को भी लोग अपने अपने हिसाब से देख रहे हैं।

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