15 साल तक सत्ता में काबिज रही भाजपा अपने ही संगठन में गुटबाजी का शिकार होने लगी है । भाजपा के मंडल अध्यक्षों की नाराजगी हो या फिर प्रदेश प्रमुख नेताओं के अलग-अलग बंटे खेमे, सभी आलाकमान के पास  शिकायत का अंबार लगा रहे है ।

प्रदेश में भाजपा के 100 से ज्यादा मंडल अध्यक्ष नाराज नजर आ रहे है , सभी होने वाली नियुक्तियों को लेकर और वर्तमान व्यवस्था को लेकर आलाकमान से शिकायत कर रहे है। संगठन के कुछ कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी पर पैसे लेकर मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति करने का भी गंभीर आरोप लगा रहे है। कार्यकताओं का कहना है ” मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति में अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को देखते हुए पैसों के आधार पर नियुक्ति की जा रही है “।

भाजपा के प्रमुख नेताओं के क्षेत्रों में ही विवाद ज्यादा तौर पर देखने को मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के क्षेत्र राजनांदगांव हो या सांसद सरोज पांडे का गृह क्षेत्र दुर्ग, मंडल अध्यक्षों की शिकायतें बाहर आ रही है। पार्टी सांसद विजय बघेल ने भी वर्तमान में चल रही व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है, और आलाकमान से इस पर गौर करने की बात कही है ।

सत्ता से दूर भाजपा आज पूर्व के जोगी युक्त कांग्रेस की तरह नजर आने लगी है जहां नेताओं की आपस में ही नहीं बनती थी और सभी शिकायत करते नजर आते थे। फिलहाल भाजपा गुटबाजी के उलझन में पूरी तरह उलझ चुकी है । 

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