प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को 1-6 देशों के साथ रिजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP)  समझौता करेंगे । इस समझौते को लेकर भारत के व्यापारियों में आक्रोश है, वे इसका विरोध कर रहे हैं ।   विरोध की वजह क्या है, इससे पहल आइये जानते हैं कि आखिरकार RCEP क्या है। आरसीईपी एक ट्रेड अग्रीमेंट है जो सदस्य देशों को एक दूसरे के साथ व्यापार में सहूलियत प्रदान करता है। अग्रीमेंट के तहत सदस्य देशों को आयात और निर्यात पर लगने वाला टैक्स नहीं भरना पड़ता है या बहुत कम भरना पड़ता है। इस अग्रीमेंट पर आसियान के 10 देशों के साथ-साथ छह अन्य देश, जिसमें भारत भी शामिल है, दस्तखत करेंगे।

क्या है प्रस्ताव?
योजना के मुताबिक, भारत प्रस्तावित समझौते के तहत चीन से आने वाले करीब 80 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क घटा या हटा सकता है। भारत इसी प्रकार ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से आयातित 86 प्रतिशत उत्पादों और आसियान, जापान और दक्षिण कोरिया से आयात होने वाले उत्पादों के 90 प्रतिशत पर सीमा शुल्क में कटौती कर सकता है। आयात होने वाले सामानों पर शुल्क कटौती को 5, 10, 15, 20 और 25 साल की अवधि में अमल में लाया जाना है। भारत का 2018-19 में RCEP के सदस्य देशों में से चीन, दक्षिण कोरिया और आस्ट्रेलिया सहित 11 देशों के साथ व्यापार में घाटा रहा है।

उद्योग जगत क्यों चिंतित?
भारतीय उद्योग जगत ने आरसीईपी समूह में चीन की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई है। डेयरी, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसायन समेत विभिन्न क्षेत्रों ने सरकार से इन क्षेत्रों में शुल्क कटौती नहीं करने का आग्रह किया है। उद्योग जगत को आशंका है कि आयात शुल्क कम या खत्म होने से विदेशों से अधिक मात्रा में माल भारत आएगा और स्थानीय उद्योगों पर इसका बुरा असर होगा। अमूल ने भी डेयरी उद्योग को लेकर चिंता जाहिर की थी।

क्या है विपक्ष का तर्क?
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने RCEP को लेकर शनिवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि सरकार इसके जरिए पहले ही बुरी स्थिति का सामना कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचाने की तैयारी में है।एशिया-प्रशांत के 16 देशों के साथ प्रस्तावित RCEP समझौते को लेकर सोनिया ने कहा, ‘सरकार के कई निर्णयों से अर्थव्यस्था को कम नुकसान नहीं हुआ था कि अब वह RCEP के माध्यम से बड़ा नुकसान पहुंचाने की तैयारी में है। इससे हमारे किसानों, दुकानदारों, छोटे और मझले इकाइयों पर गंभीर दुष्परिणाम होंगे।’

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