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धान के मुद्दे पर केंद्र के असहयोग के खिलाफ आंदोलन को जन आंदोलन बनाना चाहते हैं सीएम भूपेश बघेल ?

धान खरीदी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्योत्सव मैदान के मंच से धान खरीदी के लिए दिल्ली में होने वाले आंदोलन के लिए समर्थन मांगा। उन्होंने ने कहा कि कौन-कौन आएगा दिल्ली मेरे साथ..सीएम कि इतना कहते हैं.. लोगों ने एक साथ हाथ उठा कर हुंकार भरी।

सीएम भूपेश बघेल धान खरीदी के मुद्दे को जन आंदोलन बनाना चाहते हैं। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया और पर्यवेक्षक भक्त चरण दास की अध्यक्षता में बैठक की और रणनीति बनाई है।

बस्तर से आज इस रणनीति की शुरुआत हो रही हैं। कांग्रेस और सीएम भूपेश बघेल चूंकि इस आंदोलन को जन आंदोलन  बनाना चाहते हैं। इस लिए इसे जन समर्थन बेहद जरुरी है। इस लिए कांग्रेस जिला और ब्लॉक स्तर से किसानों से हस्ताक्षर लिए जाएँगे और फिर सीएम भूपेश  बघेल इसे सड़क मार्ग से दिल्ली लेकर जाएंगे।

सीएम भूपेश बघेल का सड़क मार्ग से जाना यूँ ही नहीं है। सीएम किसानों के साथ दुसरे राज्यों के किसानों को भी केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के बारे में बताएंगे।   

क्यों है केंद्र और राज्य सरकार की बीच तकरार

राज्य सरकार प्रदेश में किसानों से धान खरीदने का काम मंडी और समीतियों के माध्यम से करती है। अब यही धान मीलिंग होता है यानी धान की कुटाई होती है। मिलिंग के बाद चावल को सरकार सेंट्रल पूल में खरीद लेती है। बाद में इसी चावल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बीपीएल परिवारों को बांटा जाता है। अब यदि सरकार धान खरीद ले तो उसे रखेगी कहां, इससे बचने के लिए केंद्र सरकार ने नियम बनाया कि, यदि राज्य की सरकारें किसानों को समर्थन मूल्य से उपर धान का बोनस राशि देगी। ऐसे में धान ज्यादा आएगा और किसानों का फायदा होगा, सरकार को ज्यादा पैसा देना होगा। इसलिए सरकार कह रही है कि, जो प्रदेश सरकार बोनस देगी उससे केंद्र सरकार चावल नहीं खरीदेगी न ही उन्हें समर्थन मूल्य दिया जाएगा। इस तरह किसानों के धान का पूरा पैसा राज्य सरकार को अपने खजाने से देना होगा। चुंकि यह राशि बहुत बड़ी है इसलिए राज्य सरकार इसे नहीं दे सकती। तब प्रदेश सरकार इसी नियम में केंद्र से छूट देने की मांग कर रही है कि, बोनस राज्य अपने खजाने से देगी लेकिन समर्थन मूल्य किसान का अधिकार है उसे मिलना चाहिए। इस नियम में रमन सरकार के दौरान भी मोदी सरकार ने छूट दी थी। लेकिन सरकार बदली तो केंद्र सरकार भी अपने पुराने फैसले से पलट गई। इसी बात को किसानों को बताने और मोदी सरकार पर प्रेशर बनाने प्रदेश कांग्रेस आंदोलन कर रही है।

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