छ.ग. सिनेमा/कलावीडियो

जब अपने ही बेटे की अर्थी के सामने मां ने गाया उसका पसंदीदा गीत

राजनांदगांव के इस वीडियो की सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है। जो भी इस वीडियो को देख रहा है उसके मु:ह से शब्द नहीं फूट रहे हैं, दरअसल यह वीडियो पूनम तिवारी का है और शव उनके बेटे सूरज तिवारी है। पूनम तिवारी लंबे समय तक हबीब तनवीर के नाट्य संगठन का हिस्सा रही हैं।
बिते दिन उनके बेटे सूरज तिवारी की युवाअवस्था में मौत हो गई। उनका पार्थीव शरीर घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। इस वीडियो में बहुत से लोग उनके आसपास बैठकर रो रहे हैं। मगर उनकी मां पूनम तिवारी अपने बेटे का पसंदीदा गीत चोला माटी के राम गा रही हैं।
इस गीत में गीता का सार छिपा हुआ है। चोला माटी के राम गीत के मायने हैं कि, यह शरीर मिट्टी का बना है इसका कोई भरोसा नहीं है। इस दुनिया में कोई हमेशा के लिए नहीं आया है। राजा हो या भिखारी हो सबकी बारी एक दिन आनी ही है। द्रोणाचार्य जैसे गुरू इस दुनिया से चले गए कर्ण जैसे दानी भी यहां नहीं रहे। काल किसी को नहीं छोड़ता सबको एक दिन जाना है। रावण के अभिमान को भी काल ने तोड़ दिया।

https://www.facebook.com/devesh.amora/videos/2645100168882691/

सोशल मीडिया पर पूनम तिवारी को कलाकार, साहसी मां जैसे शब्दों से संबोधित करते हुए युजर्स ने कुछ इस तरह की प्रतिक्रियाएं दी है।

देवेश तिवारी ने लिखा कि –

राजनांदगांव की पूनम तिवारी आज और विराट हो गईं
बेटे की अर्थी , जवान बेटे की चिता के सामने 
जीवन के रहने और जाने का गीत
गीता के सार का छत्तीसगढ़ी संस्करण अपने रुआंसे कंठ से गाना उनके भीतर के कलाकार को दिखाता है
इस तरह कलाकार अपने दुःख में भी अपनी पीड़ा के सामने यथार्थ को ऐसे खड़ा करता है
जैसे कुरूक्षेत्र में अर्जुन के सामने श्री कृष्ण अपना विशाल स्वरूप दिखाते हैं
ऐसा कलेजा एक छत्तीसगढ़ीन दाई का हो सकता है जो मृत्यु के शोक में अपने पुत्र के कान में उसकी समझ की भाषा में वह ज्ञान फूंक दे जिससे 13 दिन आस पास रहने वाले आत्मा के मिथक को दिलासा मिले और उससे बढ़कर एक मां के वात्सल्य को घड़ी भर का ढांढस
ऐसी तस्वीर न देखी न देखने की कामना है कि

अर्थी सामने थी फिर भी मां न रो पाई
शब्द फूटे तो भी यथार्थ के गीत गाई

मयंक ठाकुर ने अपने फेसबुक में लिखा कि –

किसी मां के सामने उसके जवान बेटे की अर्थी निकलने का दर्द क्या होता है, ये शब्दों में नही बयां किया जा सकता। ये तस्वीरे झकझोर देने वाली है..??

राजनांदगाँव में सुप्रसिद्ध अभिनेत्री और लोक गायिका पूनम तिवारी ने अपने बेटे सूरज की अर्थी के सामने अपने नाटक का सुप्रसिद्ध गाना “एकर का भरोसा चोला माटी के राम” गाया। पूनम पहले भी इसे हज़ारों बार मंच से गा चुकी हैं किन्तु आज जो दुख दर्द उसकी आवाज़ में था, वो एक माँ की पीड़ा के साथ उसके हौसल्ले और जज़्बे को बयां कर रहा था।
हबीब तनवीर के बहुचर्चित नाटक चरणदास चोर से अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले संगीत नाट्य अकादमी सम्मान से सम्मानित दीपक तिवारी के बेटे सूरज तिवारी का आज निधन हो गया. सूरज की अर्थी पूरे गीत संगीत के साथ उसकी इच्छा के अनुरूप निकली।

दीपक और पूनम का सूरज अस्त हो गया, सादर नमन??

राघवेंद्र साहू ने लिखा – जीवन और मृत्यु की सच्चाई को स्वीकार कर आत्मसात कर लेने का इससे बेहतर उदाहरण शायद ही कभी देखने सुनने को मिला हो….एक मां अपने जवान बेटे को खो देने के बाद भी इस सच्चाई से गाना गा रही है कि मेरी आंखें बार बार नम हो जा रही हैं लेकिन इस मां के जज़्बात उसके शब्दों में बयां हो रहे हैं…सूरज को विनम्र श्रद्धंजलि…और इस मां के लिए शब्द ही कम पड़ गए हैं।

कुणाल शुक्ला ने लिखा – हमारे लिए यह एकदम नया है कि संगीत की धुन और गायन के साथ किसी का अंतिम संस्कार हो।
अमेरिका औऱ यूरोप में यह बहुत ही सामान्य सी बात है,वहां किसी सेलेब्रिटी का अंतिम संस्कार एक शानदार उत्सव की तरह होता है।
ताबूत में पड़े शव के सामने शानदार गीत संगीत के आयोजन के साथ साथ उस व्यक्ति के जीवन से जुड़ी लंबी भाषण बाज़ी चलती है।
याद करिये प्रिंसेस डायना के अंतिम संस्कार में एल्टन जॉन ने गुडबाय इंग्लैंड रोज़(कैंडल इन द विंड) गाया था जो कि उन्होंने मर्लिन मुनरो के अंतिम संस्कार के समय भी गाया था।

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