खई खाजाना

छत्तीसगढ़ के खान-पान से रूबरू करता राजधानी में बना गढ़ कलेवा, बन चूका है अब युवाओं का अड्डा

अगर आप छत्तीसगढ़िया पकवान खाने के शौंकीन हैं, तो! प्रदेश की राजधानी के घड़ी चौक स्थित गढ़ कलेवा से बेहतर जगह नहीं हो सकती। यह जगह आज युवाओं के साथ-साथ बड़े-बुजुर्गों का भी पसंदीदा जगह बन चूका है। यहां मिलने वाले छत्तीसगढ़ के पकवान सभी को अपनी ओर खींचता है, सुबह से शाम तक लगी भीड़ से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये जगह लोगों में कितना लोकप्रिया है।

गढ़ कलेवा में छत्तीसगढ़ के चावल से बने रोटी-पीठा और पकवान मिलते है, जिसे खाने हजारों लोग दिन भर में आते हैं। संस्कृति विभाग की ओर से लीज में चलाना के लिए मिला गढ़ कलेवा से दर्जन भर महिलाओं को रोजगार तो मिला ही है साथ ही राजधानीवासियों को छत्तीसगढ़ी पकवान का जायका लेने की सबसे पसंदीदा जगह भी बना है।

यहां फरा,चीला,बफोरी,अइरसा,खुरमी,पपची,चौसेला,गुलगुला, साबुदाने के पापड,अदौरी बरी ,रखिया बरी ,लाइ बरी,मसाले वाली मिर्ची आदी परोसे जाते हैं। इस सब के साथ हरी मिर्च की चटनी और लाल मिर्च से बनी फटाका चटनी परोसी जाती है, जो सभी पकवानों के स्वाद को और भी बढ़ा देता है।

गढ़ कलेवा खुलने के बाद से छत्तीसगढ़ी पकवान की डिमांड बढ़ी है, और देश की राजधानी दिल्ली में भी यह पकवान परोसे जा रहे हैं। इससे छत्तीसगढ़ में नहीं बल्की छत्तीसगढ़ के बहार रहने वालो लोगो की भी पसंद बन चुकी है।  

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा के नाम से जाना जाता है क्योकी यहां धान की खेती सबसे ज्यादा होती है इसलिए यहां चावल और इससे बनने वाले पकवान मुख्य भोजन होते है। गढ़ कलेवा में छत्तीसगढ के सारे सुखे,गीले नाश्ते के साथ भोजन थाली की भी व्यवस्था है। जिसमें छत्तीसगढ़ के बीजोरी,बरी,जीमीकांदा से लेकर कड़ही और भी छत्तीसगढी व्यंजन परोसे जाते है।

गढ़ कलेवा में सामान्य दिनों में मिलने वाले खानपान की समाग्रियों के अतिरिक्त गर्मी के मौसम में पीने के लिए छाछ,आम पना,बेल का शरबत,नींबु शरबत,सत्तु,लस्सी और भी पेय पदार्थ की व्यवस्था है।

और सबसे महत्वपूर्ण यहां छत्तीसगढ़ के संस्कृति को देखते हुए लोगो के बैठने की उतम व्यवस्था के साथ छत्तीसगढ़ से जुडी कलाकृतियां बनाई गई हैं है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.